दुर्ग जिले में टीबी रोकथाम व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। भिलाई-दुर्ग और निकुम ग्रामीण क्षेत्र के 20 से अधिक 10 बिस्तर अस्पतालों में लिए गए 150 से ज्यादा टीबी जांच के स्पूटम सैंपल खराब हो गए हैं। इसका कारण यह है कि अस्पताल से लैब तक सैंपल पहुँचाने वाले तीन टीबी रनर अप्रैल महीने से काम बंद कर चुके हैं।
फील्ड में टीबी संदिग्ध मरीजों के सैंपल छोटे अस्पतालों तक तो पहुंचे, लेकिन वहां से लैब तक नहीं पहुंच पाए। भास्कर ने 10 से अधिक अस्पतालों का सर्वेक्षण किया, जिसमें यह बात सामने आई। मार्च के अंत तक नीरज वर्मा, कौशलेंद्र महिलांगे और उमेश महिलांगे नाम के तीन टीबी रनर काम करते थे, लेकिन वे नए वित्त वर्ष में काम जारी रखने के आदेश न मिलने के कारण काम छोड़ चुके हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव ने दावा किया कि तीन रनर अब भी काम कर रहे हैं, लेकिन वे उनके नाम तक नहीं बता पाए। शहरी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पियम सिंह ने बताया कि टीबी रनर न होने के कारण कई अस्पतालों से स्पूटम सैंपल लैब तक नहीं पहुँच पाए हैं, जिसकी उन्होंने सूचना भी दी थी। वहीं, टीबी रनरों ने भी बताया कि उन्होंने अप्रैल में ही लिखित आवेदन दे दिया था।
भिलाई-दुर्ग और निकुम ग्रामीण क्षेत्र में टीबी जांच के लिए बनाए गए छह सरकारी लैब भी बगैर काम के रह गए हैं। अप्रैल से केवल उन सैंपलों की जांच हो रही है जो एनजीओ कर्मियों द्वारा सीधे लैब तक पहुंचाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को दिसंबर 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी मरीजों की जल्दी पहचान और इलाज से ही बीमारी फैलने से रोका जा सकता है।
डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव ने सवालों के जवाब में तीन टीबी रनरों के नाम याद न होने और नए रनर नियुक्ति में देरी की बात कही, लेकिन एक दिन बाद भी उन्होंने किसी रनर का नाम स्पष्ट नहीं बताया।