रैपिड अपडेट: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने कोतरलिया–जामगा रेलखंड (36 किमी) में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम पूरा कर लिया है। अब बिहारपुर जोन में कुल 462 किमी रेल पथ आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली से लैस हो चुका है।
क्या बदला है?
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ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम अब कोरबा से गेवरा रूट, चांपा, नागपुर और कोतरलिया-जामगा तक 462 किमी तक लगा है।
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कोतरलिया–जामगा (36 किमी) खंड में सिग्नल हर किलोमीटर पर स्टेशन यार्ड के बाद लगे हैं। इस तरह ट्रेनें एक-दूसरे को सुरक्षित दूरी पर चल सकती हैं।

इसका मतलब क्या हुआ?
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एक ट्रैक पर एक से अधिक ट्रेनें सुचारू रूप से चल सकेंगी — जिससे लाइन क्षमता और ट्रैफिक फ्लो में सुधार हुआ है।
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किसी सिग्नल में तकनीकी समस्या आने पर तुरंत अगली ट्रेन को रोकने की सूचना मिल जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम कम होता है।
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ऑप्टिकल फाइबर के उपयोग ने पारंपरिक कॉपर वायर को बदलकर लागत और चोरी की समस्या में कमी लाने में मदद की है।
विशेषता विवरण क्षेत्र दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), बिलासपुर ज़ोन कुल सिग्नल सेक्शन 462 किमी (कोरबा–गेवरा, चांपा–गेवरा, नागपुर–दुर्ग व कोतरलिया–जामगा) कोतरलिया–जामगा 36 किमी ट्रैक में हर किमी पर सिग्नल लाभ एक ट्रैक पर अधिक ट्रेनें, बेहतर सुरक्षा, बढ़ी क्षमता, रीयल-टाइम अलर्ट