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युवाओं में बढ़ रही अधीरता और जल्दबाजी की प्रवृत्ति, काउंसलिंग की जरूरत महसूस

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युवाओं में बढ़ रही अधीरता और जल्दबाजी की प्रवृत्ति, काउंसलिंग की जरूरत महसूस

रायपुर। वर्तमान समय में युवा मानसिक दबाव, अधीरता और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं से जूझ रहे हैं। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्टूडेंट सपोर्ट सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए थे, जिससे छात्र मानसिक और भावनात्मक समस्याओं से बाहर आ सकें।

छत्तीसगढ़ के पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रविवि) के मनोविज्ञान विभाग ने इस दिशा में पहले से ही कदम बढ़ा दिए हैं। कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल के अनुसार, बीते दो वर्षों में विभाग द्वारा 1500 छात्रों का सर्वेक्षण किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि लगभग 100 छात्रों को काउंसलिंग की गंभीर आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, छात्रों में तीन प्रमुख समस्याएं उभर कर सामने आईं—पहली, धैर्य की कमी; दूसरी, हर चीज को जल्दी पाने की चाह; और तीसरी, डिप्रेशन जैसी मानसिक स्थिति। शिक्षा, करियर और पारिवारिक अपेक्षाओं के दबाव में कई छात्र अवसादग्रस्त हो जाते हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है।

काउंसलिंग के साथ स्किल डेवेलपमेंट पर भी फोकस

UGC की गाइडलाइन के अनुसार, इन सपोर्ट सेंटर्स में प्रोफेशनल काउंसलर नियुक्त किए जाएंगे जो छात्रों को परीक्षा की चिंता, करियर असमंजस, रिश्तों की जटिलता और निजी समस्याओं को समझने और सुलझाने में मदद करेंगे।

इन केंद्रों का उद्देश्य केवल समस्या समाधान नहीं, बल्कि छात्रों के व्यक्तित्व विकास और मानसिक मजबूती पर भी ध्यान केंद्रित करना है। इसके लिए समूह गतिविधियाँ, योग, ध्यान, खेलकूद, हेल्थ टॉक और समय प्रबंधन जैसे सत्रों का आयोजन किया जाएगा।

साथ ही, ऑनलाइन काउंसलिंग और टेलीथैरेपी की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि दूर-दराज के छात्र भी इन सेवाओं का लाभ ले सकें। इन सेंटर्स के संचालन की जिम्मेदारी संबंधित कॉलेजों के प्राचार्य या विश्वविद्यालय निदेशक को सौंपी जाएगी।

यह पहल छात्रों को न केवल मानसिक रूप से स्वस्थ बनाएगी, बल्कि उन्हें एक सकारात्मक और समर्थ भविष्य की ओर भी अग्रसर करेगी