रायपुर। गणेश चतुर्थी के अवसर पर राजधानी रायपुर में इस बार गणपति बप्पा का स्वागत बेहद खास तरीके से हो रहा है। शहरभर में सैकड़ों पंडाल सज चुके हैं और सोमवार से मूर्तियों की स्थापना का क्रम शुरू हो गया है। इस बार कई आयोजन अपने अनोखे स्वरूप के कारण चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
सोने का मुकुट पहनेंगे बप्पा
गोलबाजार स्थित श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति की ओर से हर साल की तरह इस बार भी बप्पा को स्वर्ण श्रृंगार कराया जाएगा। समिति 2018 से भगवान गणेश को सोने का मुकुट पहनाने की परंपरा निभा रही है। इस बार 750 ग्राम वजनी सोने का मुकुट सजाया जाएगा, जिसकी कीमत करीब 70 लाख रुपए आंकी जा रही है। यह आयोजन अपने 116वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

AI से बनी अनोखी प्रतिमा, पलकें झपकेंगी
लाखे नगर में स्थापित गणपति प्रतिमा इस बार तकनीकी प्रयोगों के कारण खास आकर्षण का केंद्र है। मूर्ति की डिजाइन पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार की गई और इसमें मोटर फिट कर बप्पा की आंखों को झपकने की सुविधा दी गई है। प्रतिमा का फेस रिवील आज शाम होगा, जिसका श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

शिव महिमा पर आधारित पंडाल
गुढ़ियारी गणेशोत्सव समिति ने इस बार भगवान शिव की कथाओं पर आधारित 15 हजार वर्गफुट का भव्य पंडाल तैयार किया है। इसमें सागर मंथन, गंगा अवतरण, अर्धनारीश्वर, भोले की बारात और रावण द्वारा कैलाश पर्वत उठाने जैसी जीवंत झांकियां दिखाई देंगी। करीब 25 लाख रुपए की लागत से बने इस पंडाल में श्रद्धालु सौर मंडल जैसी संरचना के बीच से होकर गणेश दर्शन करेंगे।
धूमकेतु अवतार में बप्पा
तात्यापारा की श्री भारतीय समाज समिति इस बार गणेश प्रतिमा को धूमकेतु अवतार में स्थापित कर रही है। राजवाड़ा किला थीम पर बने पंडाल में प्रतिमा की स्थापना 38वें साल में की जा रही है।

हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
छोटापारा का गणेशोत्सव आधी सदी से धार्मिक सौहार्द की मिसाल पेश करता आ रहा है। यहां गणेश पंडाल की सजावट, झांकियां और प्रसाद वितरण सभी कार्य हिंदू-मुस्लिम समुदाय मिलकर करते हैं। यह आयोजन न सिर्फ भक्ति का केंद्र है बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बन गया है।
👉 इस बार रायपुर का गणेशोत्सव आस्था, आधुनिकता और सामाजिक सद्भाव का अनूठा संगम बनकर सामने आया है।