छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है। 18 लाख की आबादी वाले इस शहर में सिटी बसें केवल चार रूट पर ही संचालित हो रही हैं, जबकि बाकी 18 से अधिक रूट पूरी तरह से बंद पड़े हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जो स्टेशन, एम्स, कोटा और सेजबहार जैसे इलाकों तक पहुंचने के लिए 250 से 400 रुपये तक ऑटो चालकों को देने को मजबूर हैं।
कम रूट, ज्यादा किराया
रायपुर रेलवे स्टेशन से कई प्रमुख इलाकों के लिए सिटी बसें पूरी तरह से बंद हैं। ऐसे में लोगों को प्राइवेट ऑटो या ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ रहा है। बोरियाखुर्द जाने के लिए स्टेशन पर पहुंचे एक परिवार से ऑटो चालकों ने 300 रुपए तक की मांग की, जबकि पहले यही दूरी सिटी बस में 20-25 रुपए में तय हो जाती थी।
अव्यवस्था के शिकार ये प्रमुख रूट
रेलवे स्टेशन से कुम्हारी, माना एयरपोर्ट, मंदिर हसौद, नवागांव, विधानसभा, खरोरा, सिलियारी, उरला, भाठागांव, एमएम फन सिटी, चंपारण, चंदखुरी, नवा रायपुर, भिलाई और दुर्ग जैसे प्रमुख रूट पूरी तरह से सिटी बस सेवा से वंचित हैं। सेजबहार जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में भी एक भी सिटी बस नहीं चल रही है।
लोगों का दर्द – इलाज के लिए भी परेशानी
एम्स में इलाज के लिए आए ईश्वरेंद्र ठाकुर बताते हैं, “मरीज को लेकर मैं चरोदा जाना चाहता था, लेकिन बस नहीं है। जो गाड़ी आई, उसमें भी भीड़ इतनी थी कि चढ़ना मुश्किल हो गया।”
वहीं कुम्हारी से आई संगीता सिंह कहती हैं, “पहले हम 25 रुपए में सिटी पहुंच जाते थे, अब 300 रुपए देने पड़ते हैं।”
कोरोना के बाद घट गईं बसें
सिटी बस ऑपरेटर मनीष जैन ने बताया कि रायपुर में 67 सिटी बसें थीं, जिनमें से फिलहाल केवल 36 ही चालू हालत में हैं। बाकी या तो मरम्मत की जरूरत में हैं या पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं। सीमित संसाधनों के चलते सभी रूट पर बसें चलाना संभव नहीं है।
ऑटो वालों की मनमानी पर कोई नियंत्रण नहीं
लोगों का कहना है कि सिटी बस सेवा बंद होने का सबसे ज्यादा फायदा ऑटो चालकों को हो रहा है, जो मनमाना किराया वसूल रहे हैं। कई बार यात्रियों और बस कर्मचारियों के बीच झगड़े और मारपीट की घटनाएं भी सामने आई हैं।
निष्कर्ष
रायपुर जैसे राजधानी शहर में सार्वजनिक परिवहन की ऐसी हालत न केवल लोगों को आर्थिक रूप से प्रभावित कर रही है, बल्कि शहर की छवि पर भी सवाल खड़े कर रही है। प्रशासन को जल्द से जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।