Home Chhattisgarh news रायपुर में बच्चों को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ने की नई पहल, 61 सरकारी स्कूल होंगे हैरिटेज स्कूल

रायपुर में बच्चों को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ने की नई पहल, 61 सरकारी स्कूल होंगे हैरिटेज स्कूल

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रायपुर में बच्चों को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ने की नई पहल, 61 सरकारी स्कूल होंगे हैरिटेज स्कूल

रायपुर के 61 सरकारी स्कूलों को अब हैरिटेज स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिनकी स्थापना आजादी से पहले हुई थी। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को उनके स्कूलों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। इन स्कूलों में स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों और अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों के बारे में पढ़ाया जाएगा, साथ ही स्कूलों का नाम भी उन क्रांतिकारियों के नाम पर रखा जाएगा।

यह पहल न केवल बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने में मदद करेगी, बल्कि रायपुर को एक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित करेगी, क्योंकि लोग इन ऐतिहासिक स्कूलों को देखने के लिए शहर आएंगे।

शिक्षा विभाग ने पिछले माह सभी सरकारी स्कूलों से उनके नाम, स्थापना वर्ष और उन महत्वपूर्ण व्यक्तियों की जानकारी मांगी थी जिन्होंने आजादी से पहले इन स्कूलों में पढ़ाई की थी। इन जानकारियों के आधार पर स्कूलों को डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा और स्कूलों की कमजोरियों जैसे मरम्मत, शिक्षकों की कमी, शैक्षणिक सामग्री आदि की पूर्ति की जाएगी।

शैक्षिक कैलेंडर में बदलाव: कक्षा 1 से 3 तक किताबों के नाम हुए आसान

बच्चों के तनाव को कम करने के लिए इस वर्ष प्राथमिक कक्षाओं की किताबों के नामों में बदलाव किया गया है। अब कक्षा 3 की गणित की किताब का नाम “आनंदमय गणित” रखा गया है, जबकि अंग्रेजी की किताब का नाम “मृदंग” हुआ है। कक्षा 2 में “संतूर” नाम से नई किताब भी शामिल की गई है।

इस शैक्षणिक सत्र से कक्षा 3 में कला शिक्षा (बांसुरी), शारीरिक शिक्षा, और आरोग्य (खेल योग) को तथा कक्षा 6 में कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा, आरोग्य और व्यवसायिक शिक्षा को शामिल किया गया है। चौथी और पांचवीं कक्षा की किताबों में कोई बदलाव इस बार नहीं हुआ है, लेकिन अगले सत्र में इनके नाम बदले जाएंगे।

बैगलेस डे और पुस्तकालय समय

वार्षिक कैलेंडर के अनुसार अब बैगलेस डे हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को मनाया जाएगा, जब बच्चे बिना बैग के स्कूल आएंगे। इसके अलावा, कक्षा 3 से 8 तक सभी स्कूलों में सप्ताह में एक दिन विशेष पुस्तकालय का समय निर्धारित किया गया है ताकि बच्चों में पढ़ने की आदत और ज्ञान बढ़ाया जा सके।

यह नई पहल बच्चों के शैक्षणिक अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी मदद करेगी।