राजधानी रायपुर के कटोरा तालाब इलाके में स्थित संत कंवरराम प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बेहद दयनीय है। यहां आज भी 60 साल पुराने जर्जर भवन में बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ रही है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक ही कमरे में दो-दो कक्षाएं और हेडमास्टर का ऑफिस भी चलता है।
एक ही कमरे में दो क्लास, ध्यान भटकते हैं बच्चे
स्कूल में कुल चार ही क्लासरूम हैं, लेकिन पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई कराई जाती है। नतीजतन पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को एक साथ बैठना पड़ता है। उसी कमरे में हेडमास्टर का ऑफिस भी है। शिक्षक को दोनों कक्षाओं पर एक साथ ध्यान देना मुश्किल होता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
जर्जर भवन, बारिश में टपकती छत
स्कूल की इमारत काफी जर्जर हो चुकी है। लोहे की चादर से बनी छत जगह-जगह टूट गई है। गर्मी में अंदर बैठना मुश्किल हो जाता है, वहीं बारिश में पानी टपकने से बचाव के लिए बाल्टियां रखनी पड़ती हैं। दीवारों में दरारें हैं और फर्श भी टूट चुका है, जिसे अस्थायी रूप से रेत से भर दिया गया है।
आदेश के बावजूद नहीं हुआ डिस्मेंटल
जानकारी के मुताबिक, इस भवन को तोड़ने का आदेश एक साल पहले जारी हो चुका था। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिस वजह से बच्चों और शिक्षकों को इसी जर्जर भवन में पढ़ाई जारी रखनी पड़ रही है।
गंगानगर स्कूल में भी दो शिफ्ट
ऐसी ही स्थिति गंगानगर स्थित एक अन्य प्राथमिक विद्यालय की भी है। यहां पांच कक्षाओं के लिए केवल चार कमरे हैं। जर्जर भवन को हाल ही में गिरा दिया गया, जिसके बाद अब दो शिफ्ट में पढ़ाई कराई जा रही है। सुबह की शिफ्ट में पहली से तीसरी तक और दोपहर में चौथी-पांचवीं की कक्षाएं लगती हैं।
अधूरा भवन, बच्चों का भविष्य अधर में
स्कूल परिसर में नया भवन बनने का काम कई साल से चल रहा है। बीच में ठेकेदार ने काम रोक दिया था, जिससे निर्माण अधूरा रह गया। अब काम दोबारा शुरू हुआ है, लेकिन पूरा होने में अभी समय लगेगा। शिक्षकों का कहना है कि भवन तैयार होते ही बच्चों को नई इमारत में शिफ्ट किया जाएगा और पुराना भवन तोड़ दिया जाएगा।
👉 यह हाल राजधानी के स्कूल का है, ऐसे में ग्रामीण इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था सुधार की राह पर बहुत धीमी गति से बढ़ रही है।