Home Chhattisgarh news Raigarh news बजट स्वीकृत, पर पैसा अटका: 80 करोड़ से बना अस्पताल अधूरा, मरीज भी नहीं पहुंच रहे

बजट स्वीकृत, पर पैसा अटका: 80 करोड़ से बना अस्पताल अधूरा, मरीज भी नहीं पहुंच रहे

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बजट स्वीकृत, पर पैसा अटका: 80 करोड़ से बना अस्पताल अधूरा, मरीज भी नहीं पहुंच रहे

परसदा में 30 करोड़ रुपए की लागत से तैयार ईएसआईसी अस्पताल को शुरू हुए एक साल से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अब तक यह पूरी तरह संचालित नहीं हो पाया है। निर्माण एजेंसी सीपीडब्ल्यूडी ने अधूरे कार्यों के लिए 10 करोड़ 55 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग की थी। केंद्र से स्वीकृति तो मिली, लेकिन राशि अब तक जारी नहीं हुई। नतीजा यह है कि अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर, फर्नीचर, मेडिकल उपकरण और ऑक्सीजन पाइपलाइन जैसे अहम काम अधूरे पड़े हैं।

फिलहाल ओपीडी शुरू कर दी गई है, मगर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है। रोजाना केवल 10 से 12 मरीज ही अस्पताल पहुंचते हैं। वहीं, कर्मचारी भी आवश्यक सुविधाओं के अभाव में जांच करने से बचते दिख रहे हैं।

अधूरी सुविधाओं में चल रहा संचालन

अस्पताल को अधूरी स्थिति में ही हैंडओवर कर दिया गया। अब रीजनल या हेड ऑफिस के जरिए बचे कार्य पूरे किए जाएंगे। डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया जारी है, लेकिन शहर से 13 किलोमीटर दूर स्थित इस अस्पताल में सुविधा और कनेक्टिविटी की दिक्कत के चलते कोई भी विशेषज्ञ डॉक्टर ज्यादा समय तक टिक नहीं रहा। इस समय केवल एमबीबीएस डॉक्टरों के जरिए ओपीडी और सीमित आईपीडी सेवाएं दी जा रही हैं।

पानी और परिवहन की दिक्कत

अस्पताल पहाड़ी इलाके में बना है, जहां पानी का स्थायी स्रोत नहीं है। गर्मियों में बोरवेल फेल हो जाते हैं। साथ ही अस्पताल तक पहुंचने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट और शेयरिंग ऑटो उपलब्ध नहीं हैं। यही वजह है कि आसपास के करीब 35 हजार कर्मचारियों और जांजगीर, सारंगढ़, सवती और जशपुर जैसे जिलों से आने वाले लाभार्थियों को अभी तक इसका पूरा फायदा नहीं मिल रहा।

बजट पर रोक से अटके काम

निर्माण के दौरान बिल्डिंग, स्टाफ क्वार्टर, पानी, बिजली और पार्किंग जैसी सुविधाएं तो बनाई गईं, लेकिन गैस पाइपलाइन, नॉन मेडिकल उपकरण, फर्नीचर और ऑपरेशन थियेटर के लिए बजट जारी नहीं हुआ। सीपीडब्ल्यूडी ने 10 करोड़ 55 लाख रुपए की मांग की थी, पर स्वीकृति मिलने के बाद भी राशि का 10% हिस्सा तक जारी नहीं किया गया। अब अधूरे कार्यों को हेड ऑफिस के जिम्मे सौंप दिया गया है।