छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों को सप्लाई की जा रही जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में ओपन हार्ट सर्जरी के बाद दिए जाने वाले प्रोटामिन सल्फेट इंजेक्शन को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, नासिक की वाइटल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा निर्मित यह इंजेक्शन तय समय पर असर नहीं कर रहा है, जिससे मरीजों की ब्लीडिंग नहीं रुक रही और जान का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस इंजेक्शन को देने के 1-2 मिनट में खून सामान्य हो जाना चाहिए, लेकिन खराब गुणवत्ता के कारण इसमें 20-25 मिनट तक लग रहे हैं। इससे मरीजों में अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है। डॉक्टर मजबूरी में बाहर से दवाएं मंगाकर मरीजों को दे रहे हैं, जिससे पता चलता है कि सीजीएमएससी द्वारा सप्लाई की गई दवा मानकों पर खरी नहीं उतर रही।
क्वालिटी कंट्रोल पर भी सवाल
उल्लेखनीय है कि दवाएं सप्लाई से पहले सीजीएमएससी द्वारा लैब टेस्ट में पास बताई जाती हैं, लेकिन अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उनकी गुणवत्ता गिर जाती है। सवाल उठ रहा है कि जांच में पास होने के बावजूद दवाएं मरीजों पर असर क्यों नहीं कर रहीं?
केस स्टडी: नर्स को सीरप पीने के बाद चक्कर
एक अन्य मामले में आंबेडकर अस्पताल की नर्स ने खांसी के लिए सीजीएमएससी से सप्लाई सीरप का सेवन किया। कुछ ही देर में उन्हें चक्कर आ गया और वे बेहोश हो गईं। हालत बिगड़ने पर उन्हें भर्ती किया गया, जहां उनकी धड़कन 140 तक पहुंच गई थी, जो सामान्यतः 100 से नीचे होनी चाहिए।

कई दवाओं पर संदेह
केवल प्रोटामिन ही नहीं, बल्कि प्रेमाडॉल 50 मिग्रा, लिनिन जोनाड्रिल सीरप, और नॉर्मल व डेक्सट्रोज स्लाइन जैसी अन्य दवाओं को लेकर भी साइड इफेक्ट और रिएक्शन की शिकायतें सामने आई हैं।
कार्रवाई की शुरुआत
शिकायतों के बाद अस्पताल प्रबंधन ने सीजीएमएससी को पत्र लिखकर इन दवाओं की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई है और सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि संदिग्ध दवाओं को सेंट्रल स्टोर में जमा करें, ताकि किसी और मरीज की जान जोखिम में न पड़े।
डॉ. संतोष सोनकर, आंबेडकर अस्पताल अधीक्षक के अनुसार:
> “शिकायतों के आधार पर इंजेक्शन और अन्य दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि ये दवाएं मरीजों पर असर क्यों नहीं कर रहीं।”
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे मानकों से समझौता करके लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।