राजधानी के जगन्नाथ मंदिरों में इस बार पुरीधाम जैसी भव्य रथयात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में भगवान जगन्नाथ, उनके भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए रथों को रंग-बिरंगे आकर्षक रूप में सजाया जा रहा है। गायत्री नगर स्थित मंदिर में नए रथ पर विराजमान होकर भगवान भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे।
बीमार हैं महाप्रभु, औषधीय काढ़े का भोग चढ़ाया जा रहा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ के अत्यधिक स्नान के कारण वे अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद मंदिरों के पट 15 दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ स्थगित कर दी जाती है। इस दौरान केवल औषधियों से बने काढ़े का भोग अर्पित किया जाता है। सदरबाजार, टूरी हटरी और गायत्री नगर के मंदिरों में यह परंपरा निभाई जा रही है।
नेत्रोत्सव के बाद निकलेगी रथयात्रा
भगवान के स्वस्थ होने पर सबसे पहले नेत्रोत्सव मनाया जाता है, जिसमें उन्हें स्नान कराकर विशेष श्रृंगार और आरती की जाती है। इसके बाद रथयात्रा निकाली जाती है, जिसमें भगवान अपने भाई-बहन के साथ भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके साथ चलते हैं।
पुरी जाने वाली ट्रेनें फुल, स्पेशल ट्रेन का संचालन
छत्तीसगढ़ से बड़ी तादाद में श्रद्धालु पुरी की रथयात्रा में भाग लेने जाते हैं। इसी वजह से इस मार्ग की सभी ट्रेनें सप्ताहभर तक पूरी तरह बुक चलती हैं। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे 27 जून से गोंदिया से पुरी तक एक विशेष ट्रेन चला रहा है, जिसमें कुल 18 डिब्बे होंगे।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे परंपरा
रथयात्रा के दिन जब भगवान जगन्नाथ मंदिर से रथ तक जाते हैं, तब राज्यपाल और मुख्यमंत्री पारंपरिक रूप से सोने की झाडू से मार्ग की सफाई करते हैं। यह रस्म महाप्रभु को जगत का सम्राट मानकर निभाई जाती है।
महाप्रभु को चढ़ाया जाएगा स्वास्थ्यवर्धक प्रसाद
गायत्री नगर मंदिर के अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि चूंकि भगवान अभी अस्वस्थ हैं, इसलिए उन्हें पौष्टिक आहार के रूप में अंकुरित चना और मूंग का भोग अर्पित किया जाता है। यह प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित भी किया जाएगा।
रथयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और राजधानी में धार्मिक वातावरण बना हुआ है।