छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के अंतर्गत निजी स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया जारी है। दूसरे चरण में दाखिले चल रहे हैं, लेकिन एक बार फिर हजारों सीटें खाली रह जाने की आशंका है। राज्य में आरटीई के तहत कुल 53,415 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से अब तक 41,441 सीटों पर ही दाखिला हो पाया है। इसके अलावा, 6,974 बच्चों का चयन हुआ है, जिनके दाखिले होने बाकी हैं।
विशेष रूप से रायपुर जिले की बात करें तो यहां की 5,203 आरटीई सीटों में से 4,134 पर ही अब तक दाखिले हुए हैं, जबकि 705 बच्चों का चयन हुआ है। यानी लगभग 365 सीटें अभी भी रिक्त हैं। यह स्थिति पहले चरण में भी देखी गई थी, जब चयनित 4,510 आवेदकों में से 425 सीटें खाली रह गई थीं।
यदि कुल आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ हो जाता है कि इस बार भी तकरीबन 5,000 सीटें खाली रह जाएंगी। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति प्रवेश प्रणाली में खामियों और अन्य सामाजिक कारणों की वजह से बनी हुई है।
सीटें खाली रहने के प्रमुख कारण:
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कई स्कूल शहर से दूर होने के कारण अभिभावक बच्चों को वहां नहीं भेजना चाहते।
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हिंदी माध्यम के स्कूलों में प्रवेश को लेकर भी कई माता-पिता हिचकते हैं।
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अंग्रेजी भाषा की जानकारी नहीं होने के कारण कई बार परिवार प्रवेश के बाद नाम वापस ले लेते हैं।
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प्रवेश नियमों में खामी, खासकर 2011 की पुरानी गरीबी रेखा सूची के इस्तेमाल के कारण कई ज़रूरतमंद परिवार आवेदन ही नहीं कर पाते।
पिछले साल की स्थिति
पिछले सत्र में राज्य के 6,749 निजी स्कूलों में 54,367 सीटें आरटीई के तहत उपलब्ध थीं। इनमें से केवल 46,219 सीटों पर ही बच्चों का दाखिला हुआ, जबकि लगभग 8,000 सीटें खाली रह गई थीं। हैरानी की बात यह है कि उस समय एक लाख 22 हजार से ज्यादा आवेदन आए थे, बावजूद इसके सीटें नहीं भर पाईं।
दूसरे चरण में चयनित छात्र-छात्राओं को 10 अगस्त तक प्रवेश लेना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो फिर कई सीटें रिक्त ही रह जाएंगी, जिससे एक बार फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े हो सकते हैं।