रायपुर। छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टेट और मैनेजमेंट कोटे की फीस समान होने के बावजूद कुछ एजेंट लाखों रुपए की डील कर अभ्यर्थियों को गुमराह कर रहे हैं। खास बात यह है कि एजेंट मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे की सीटों को एक करोड़ रुपए तक में “पक्की” करने का झांसा दे रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार ऐसा संभव नहीं है।
एक सीट के लिए मांग रहे 1 करोड़ रुपए
पत्रिका की पड़ताल में सामने आया है कि कुछ एजेंट एनआरआई कोटे के नाम पर 5 लाख रुपए एडवांस लेते हैं और फिर सवा करोड़ रुपए में सीट दिलाने का वादा करते हैं। एजेंटों का कहना है कि उनके बिना सीट मिलना मुश्किल है, जबकि यह पूरी तरह से अवैध और भ्रामक है।
स्टेट और मैनेजमेंट कोटे में कोई अंतर नहीं
छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में स्टेट और मैनेजमेंट कोटे की ट्यूशन फीस लगभग एक जैसी है। कॉलेज प्रबंधन अलग से हॉस्टल, मेस और ट्रांसपोर्ट जैसे खर्चों को मिलाकर 65 लाख रुपए तक वसूलते हैं, जो सभी कोटों के लिए लागू है। फिर भी एजेंट गलत जानकारियां देकर छात्रों और अभिभावकों से मोटी रकम ऐंठने की कोशिश करते हैं।
NEET और मेरिट जरूरी, एजेंट की कोई भूमिका नहीं
मेडिकल काउंसलिंग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, चाहे मैनेजमेंट कोटा हो या एनआरआई कोटा, NEET UG क्वालिफाई करना और मेरिट लिस्ट में नाम आना जरूरी है। इसके बिना किसी भी कोटे में प्रवेश नहीं हो सकता। एजेंटों की कोई कानूनी भूमिका नहीं है।
एनआरआई कोटे की सीमाएं और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
छत्तीसगढ़ में एनआरआई कोटे की कुल 103 सीटें हैं और नियम के तहत केवल माता-पिता पक्ष के दो पीढ़ियों तक के खून के रिश्तेदार ही पात्र माने जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट भी पहले यह स्पष्ट कर चुका है कि दूर के रिश्तेदारों को प्रवेश देना गलत है और यह “सीट बेचने” जैसा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
पूर्व डीएमई और हेल्थ साइंसेज यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. ए.के. चंद्राकर ने कहा कि एजेंटों द्वारा छात्रों और माता-पिता को फंसाना कोई नई बात नहीं है। कई बार अभिभावक अपनी जीवन भर की कमाई झूठे वादों के भरोसे गंवा देते हैं और अंत में न तो सीट मिलती है और न ही पैसा वापस आता है।
निष्कर्ष
प्रदेश में मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया पारदर्शी है और डायरेक्ट डील की कोई वैध व्यवस्था नहीं है। छात्रों और अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी एजेंट की बातों में आकर गैरकानूनी तरीके से प्रवेश की कोशिश नहीं करनी चाहिए।