प्रदेश में लगातार बढ़ते लंबित राजस्व प्रकरणों को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि अब “पेशी पर पेशी” का सिलसिला खत्म होना चाहिए। सभी मामलों का निपटारा तय समयसीमा में किया जाए, ताकि लोगों का समय और धन दोनों की बर्बादी न हो।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि बार-बार पेशी लगाने से लोगों का भरोसा शासन-प्रशासन पर कम होता है। इसलिए हर अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रकरणों का निपटारा त्वरित और न्यायपूर्ण ढंग से हो। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नामांतरण, विवादित-अविवादित बंटवारे, अभिलेख दुरुस्ती, त्रुटि सुधार, भू-अर्जन, सीमांकन और डायवर्सन से जुड़े मामलों की जिलेवार समीक्षा भी की।
प्रदेश में 1 लाख से ज्यादा मामले लंबित
फिलहाल राज्य में 1,09,997 से अधिक राजस्व प्रकरण पेंडिंग हैं। इनमें 41,538 मामले 6 माह से लेकर 5 साल तक पुराने हैं। सबसे ज्यादा लंबित मामले दुर्ग जिले में 9,802 हैं। इसके अलावा बिलासपुर में 6,374, रायपुर में 6,264, बलरामपुर-रामानुजगंज में 5,645 और सरगुजा में 5,029 मामले दर्ज हैं।
लंबित मामलों का ब्योरा:
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5 साल से ज्यादा पुराने – 2,291
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3 से 5 साल पुराने – 4,026
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1 से 3 साल पुराने – 18,846
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6 माह से 1 साल पुराने – 16,375
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0 से 6 माह पुराने – 68,459
ई-कोर्ट में दर्ज होंगे सभी प्रकरण
मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने निर्देश दिए कि सभी राजस्व मामलों को ई-कोर्ट में दर्ज किया जाए, जिससे मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग आसान हो सके। इसके साथ ही रिकॉर्ड दुरुस्ती और त्रुटि सुधार से जुड़े मामलों के लिए तहसील स्तर पर विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।
छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 25 सप्ताह तक
राज्य निर्माण की 25वीं वर्षगांठ को लेकर भी कलेक्टरों को दिशा-निर्देश दिए गए। 15 अगस्त से शुरू हुआ रजत महोत्सव 25 सप्ताह तक चलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे जनता की भागीदारी का उत्सव बनाया जाए और कार्यक्रमों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जाए। इसके अलावा 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में ‘सेवा पखवाड़ा’ आयोजित होगा।