रायपुर में पेट्रोल पंप एसोसिएशन का “नो हेलमेट-नो पेट्रोल” अभियान पहले ही दिन कमजोर पड़ गया। राजधानी के अधिकतर पंपों पर बिना हेलमेट के भी लोगों को पेट्रोल दिया जाता रहा। एसोसिएशन ने खुद यह निर्णय लिया था कि 1 सितंबर से दोपहिया चालकों को केवल हेलमेट पहनने पर ही पेट्रोल मिलेगा, लेकिन पंप संचालक इस पर अमल नहीं कर सके।
ज्यादातर पंपों पर खानापूर्ति के लिए “नो हेलमेट-नो पेट्रोल” का बोर्ड जरूर लगाया गया, लेकिन हकीकत में नियम का पालन नहीं हुआ। कई संचालकों का कहना था कि उन्हें इस संबंध में कंपनियों या प्रशासन से कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं एसोसिएशन ने भी अब कदम पीछे खींचते हुए कहा है कि अचानक सख्ती करने से अव्यवस्था होगी, इसलिए पहले जागरूकता और चेतावनी दी जाएगी, उसके बाद ही पाबंदी लागू की जाएगी।
एसोसिएशन ने खुद शुरू किया था अभियान
29 अगस्त को एसोसिएशन ने डिप्टी सीएम अरुण साव और कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह को ज्ञापन सौंपकर यह घोषणा की थी कि 1 सितंबर से नियम लागू होगा। वजह यह बताई गई थी कि सड़कों पर होने वाली गंभीर दुर्घटनाओं में ज्यादातर मामलों में हेलमेट न पहनना ही मौत का कारण बन रहा है।
पहले भी कई आदेश हुए नाकाम
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जनवरी 2008: हेलमेट अनिवार्यता का सरकारी आदेश।
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जून 2014: गृह विभाग ने फिर आदेश जारी किया।
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दिसंबर 2015: रायपुर पुलिस ने स्थानीय स्तर पर लागू करने की कोशिश की।
लेकिन हर बार आदेश कागजों तक ही सीमित रह गया।
अध्यक्ष के बदले बयान
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29 अगस्त: “सामाजिक हित में फैसला लिया गया है, 1 सितंबर से बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं मिलेगा।”
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1 सितंबर: “लोगों ने हेलमेट पहनना शुरू नहीं किया है। राजधानी में जितनी गाड़ियां हैं, उतने हेलमेट दुकानों में उपलब्ध भी नहीं हैं। इसलिए धीरे-धीरे सख्ती होगी।”
10 पंपों पर चला रियलिटी चेक
शहर के 10 पंपों पर जाकर स्थिति देखी।
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जयस्तंभ चौक, फाफाडीह और श्रीनगर के पंपों पर बिना हेलमेट पेट्रोल दिया जा रहा था।
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शहीद स्मारक और मोवा के पास भी नियम लागू नहीं था।
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पटेल चौक के पंप पर ही सख्ती बरतते हुए बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं दिया गया।