रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस बार एमबीबीएस सीटें घटने की संभावना है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद राज्य के केवल रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को आरेंज ज़ोन में रखा गया है, जबकि शेष 9 कॉलेज—सिम्स बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, अंबिकापुर, महासमुंद, कांकेर, जगदलपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव—रेड ज़ोन में आ गए हैं।
एनएमसी ने हाल ही में डीएमई और सभी डीन की बैठक में यह साफ संदेश दिया है कि कॉलेजों को जरूरी खामियों को जल्द दूर करना होगा, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें। नया सत्र अगस्त में शुरू होने वाला है, उससे पहले कॉलेजों को एनएमसी से मान्यता प्राप्त करना जरूरी है। यह निरीक्षण इस बार ऑनलाइन माध्यम से किया गया है, और काउंसलिंग प्रक्रिया इसी महीने शुरू होने की उम्मीद है।
फैकल्टी की भारी कमी, नेहरू कॉलेज को छोड़कर सभी में हाल खराब
पत्रिका की पड़ताल में पता चला कि नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर में मशीनों, अधोसंरचना और फैकल्टी की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन सीनियर रेजिडेंट की संख्या कम है। वहीं, कांकेर, महासमुंद, कोरबा और दुर्ग जैसे अन्य कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी है। पिछले वर्ष बिलासपुर स्थित सिम्स में 30 सीटें घटा दी गई थीं, जिससे शिक्षा विभाग की चिंता और बढ़ गई है।
डॉ. यूएस पैकरा, डीएमई छत्तीसगढ़ ने कहा, “रायपुर को छोड़कर बाकी 9 कॉलेज रेड ज़ोन में हैं। अभी अंतिम फैसला एनएमसी के पत्र के बाद ही आएगा। हम कमियों को दूर कर रहे हैं, उम्मीद है सभी को मान्यता मिल जाएगी।”
निजी कॉलेजों में रिश्वत के सहारे मान्यता का प्रयास
नवा रायपुर स्थित एक निजी कॉलेज में सीबीआई की रेड के बाद मेडिकल शिक्षा जगत में खलबली मच गई है। जानकारी के अनुसार कॉलेज द्वारा एनएमसी के निरीक्षकों को कथित तौर पर 25 लाख रुपये रिश्वत देकर 150 से 250 सीटों तक की मान्यता बढ़ाने की कोशिश की गई थी। इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कॉलेज के डायरेक्टर और निरीक्षक शामिल हैं।
इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या निजी मेडिकल कॉलेज रिश्वत देकर मान्यता हासिल कर रहे हैं? कई डॉक्टरों ने यह भी दावा किया कि अधिकतर निजी कॉलेज इसी तरह से काम करते हैं। हालांकि कुछ कॉलेज संचालकों का कहना है कि जब सभी सुविधाएं और मानक पूरे हों, तो पैसे देने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
फैकल्टी की स्थिति कॉलेज-वार (प्रमुख आंकड़े):
| कॉलेज | प्रोफेसर (खाली पद) | एसोसिएट प्रोफेसर (खाली पद) | असिस्टेंट प्रोफेसर (खाली पद) |
|---|---|---|---|
| रायपुर | 38 (1) | 91 (29) | 166 (76) |
| बिलासपुर | 24 (10) | 63 (33) | 93 (45) |
| जगदलपुर | 22 (4) | 33 (11) | 50 (29) |
| रायगढ़ | 22 (11) | 19 (5) | 40 (17) |
| राजनांदगांव | 23 (13) | 30 (14) | 50 (37) |
निष्कर्ष:
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी, सीनियर रेजिडेंट्स की अनुपलब्धता और निरीक्षण में आई खामियों के चलते इस बार एमबीबीएस सीटों में कटौती हो सकती है। हालांकि, अधिकारी मानते हैं कि सभी खामियों को दूर कर लिया जाएगा और जल्द ही सभी कॉलेजों को मान्यता मिल जाएगी। अब नजरें 15 जुलाई तक आने वाले एनएमसी के पत्र पर टिकी हैं।