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पहली बार दिखी नई विधानसभा की झलक, अक्टूबर तक पूरी तरह तैयार होगी

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पहली बार दिखी नई विधानसभा की झलक, अक्टूबर तक पूरी तरह तैयार होगी

नवा रायपुर। राजधानी रायपुर में बन रही नई विधानसभा अब लगभग अंतिम चरण में है। पहली बार मीडिया को इसके अंदर जाने का मौका मिला, जहां करीब 80% काम पूरा हो चुका है। एक हजार से ज्यादा मजदूर दिन-रात काम कर रहे हैं और पीडब्ल्यूडी की टीम लगातार साइट पर मौजूद रहती है। अधिकारियों की मानें तो 30 अक्टूबर तक विधानसभा पूरी तरह से तैयार हो जाएगी।

कैसा होगा सेंट्रल हॉल
सेंट्रल हॉल, जहां सभी विधायक बैठेंगे, अब लगभग तैयार है। एसी इंस्टॉलेशन के बाद यहां फॉल सीलिंग का काम शुरू होगा। सितंबर तक इंटीरियर पूरा कर लिया जाएगा। 200 सीटिंग क्षमता वाले इस हॉल में शुरुआती चरण में केवल 45 सोफे लगाए जाएंगे, जिन पर दो-दो विधायक बैठेंगे। वहीं 24 मंत्रियों के लिए बनाए गए कमरों में से फिलहाल 14 ही उपयोग में लाए जाएंगे।

विशेष सत्र में उद्घाटन
1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस और रजत जयंती समारोह के दौरान इस नई विधानसभा का उद्घाटन होना तय है। इसके लिए एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी है। हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी उद्घाटन कार्यक्रम का न्यौता दिया है।

पुरानी विधानसभा से अलग क्या?

  • विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के लिए बड़े कार्यालय और अलग मीटिंग हॉल तैयार हैं।

  • डिप्टी सीएम के कमरों में स्टाफ और गेस्ट रूम का प्रावधान किया गया है।

  • 200 लोगों की दर्शक दीर्घा और 50 सीटों की मीडिया गैलरी बनाई गई है, जिसे 6 फीट मोटे कांच से कवर किया गया है।

  • मुख्य भवन के पास 1000 क्षमता वाला ऑडिटोरियम और नीचे म्यूजियम बनाया जा रहा है।

  • 8-8 बेड वाले एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक मिनी हॉस्पिटल भी तैयार हो रहे हैं।

  • 700 गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

निर्माण की रफ्तार दोगुनी
इस भवन का शिलान्यास 2020 में किया गया था और इसे 324 करोड़ रुपए की लागत से 5 लाख वर्गफुट क्षेत्र में बनाया जा रहा है। मूल रूप से इसे सितंबर 2025 तक पूरा करना था, लेकिन 2024 तक केवल 60% काम ही हुआ। रजत जयंती समारोह तक भवन को उपयोग में लाने के लक्ष्य के चलते पिछले 6 महीनों में काम की गति दोगुनी कर दी गई।

डिजाइन की खासियतें
आर्किटेक्ट संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि विधानसभा का डिजाइन ऊर्जा-संरक्षण को ध्यान में रखकर किया गया है। भवन इस तरह बनाया गया है कि प्राकृतिक रोशनी हमेशा अंदर आती रहे और केवल सत्र के समय ही कृत्रिम रोशनी का उपयोग करना पड़े। इंटीरियर में “धान की बालियों” की थीम दी गई है, जो छत्तीसगढ़ की पहचान को दर्शाएगी।

अधिकारियों की बातें
पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव ने कहा –
“यह भवन अगले 100 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। प्राकृतिक रोशनी और एसी सिस्टम के जरिए बिजली की बचत होगी। धान की थीम हमारी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाएगी।”

ईएनसी विजय भतपहरी का कहना है –
“30 सितंबर तक हम अधिकांश काम पूरा कर देंगे। इसके बाद अक्टूबर में सुधार और अंतिम काम करके विधानसभा को पूरी तरह तैयार कर दिया जाएगा।”