Home Chhattisgarh news कांकेर में नक्सलियों ने की छात्र की हत्या, स्मारक पर फहराया था तिरंगा

कांकेर में नक्सलियों ने की छात्र की हत्या, स्मारक पर फहराया था तिरंगा

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कांकेर में नक्सलियों ने की छात्र की हत्या, स्मारक पर फहराया था तिरंगा

कांकेर जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नक्सल स्मारक पर तिरंगा फहराने वाले छात्र की नक्सलियों ने हत्या कर दी। मृतक छात्र का नाम मुनेष नुरूटी है, जिसने हाल ही में जवाहर नवोदय विद्यालय नारायणपुर से 12वीं पास की थी और आगे की पढ़ाई के लिए आवेदन भी दिया था।

15 अगस्त को मुनेष ने अपने भाई और ग्रामीणों के साथ गांव बीनागुंडा स्थित नक्सल स्मारक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो उसके भाई रैनू नुरूटी ने रिकॉर्ड किया था। लेकिन यह कदम नक्सलियों को नागवार गुजरा।

16 अगस्त को नक्सली गांव पहुंचे और दोनों भाइयों को उठा ले गए। बाद में रैनू को छोड़ दिया गया, जबकि मुनेष की हत्या कर शव गांव के बाहर फेंक दिया गया। परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया।

19 अगस्त को नक्सलियों ने ग्राम संगम के पास बैनर लगाकर हत्या की जिम्मेदारी ली और छात्र पर पुलिस मुखबिर होने का आरोप लगाया। साथ ही इलाके के अन्य लोगों को चेतावनी भी दी।

पुलिस की चुप्पी और दहशत का माहौल

घटना के बाद भी परिजनों ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। एसडीओपी पखांजूर रविकुमार कुजूर ने कहा कि हत्या का कारण तिरंगा फहराना था या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। फिलहाल पुलिस अपने स्तर पर जानकारी जुटा रही है।

नक्सली काला झंडा फहराते हैं

गौरतलब है कि नक्सली स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस का हमेशा विरोध करते हैं। वे लोगों को काला झंडा लगाने के लिए दबाव बनाते हैं और कई बार स्कूलों व सरकारी दफ्तरों में खुद भी काला झंडा फहरा चुके हैं। हालांकि हाल के वर्षों में नक्सल प्रभाव घटने से अधिकतर गांवों में अब स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाया जाने लगा है।

दो नक्सली नेताओं ने किया सरेंडर

इधर, तेलंगाना के राचकोंडा में नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगा है। ककराला सुनीता उर्फ गुरूस्मृति और एक अन्य नक्सली नेता ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। बताया जा रहा है कि सुनीता, जो मारे गए सीसीएम सुधाकर की पत्नी है, लंबे समय से नक्सली संगठन की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रही थी। हथियार छोड़ने के बाद संगठन को कमजोर होने का एक और बड़ा धक्का माना जा रहा है।