Home Chhattisgarh news नक्सलियों का हौसला पस्त! छत्तीसगढ़ में 4 महिला समेत 6 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

नक्सलियों का हौसला पस्त! छत्तीसगढ़ में 4 महिला समेत 6 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

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नक्सलियों का हौसला पस्त! छत्तीसगढ़ में 4 महिला समेत 6 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और लगातार की जा रही कार्यवाही से परेशान होकर माड़ डिवीजन और अमदेई एरिया कमेटी में सक्रिय 6 माओवादी—जिनमें 4 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं—ने आत्मसमर्पण कर दिया है। आत्मसमर्पित माओवादियों में एरिया कमेटी सदस्य, पार्टी सदस्य और एलओएस मेंबर शामिल हैं, जिन्होंने समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया है।

बिना हथियार के किया आत्मसमर्पण

इन सभी ने गुरुवार को नारायणपुर में बीएसएफ, आईटीबीपी और जिला पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया। यह आत्मसमर्पण नवल सिंह (कमांडेंट 135वीं बटालियन बीएसएफ), संजय कुमार (कमांडेंट 53वीं बटालियन आईटीबीपी), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया, और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष किया गया।

कई इनामी नक्सली शामिल, एक पर 5 लाख का इनाम

आत्मसमर्पण करने वालों में धनाय हलामी पर 5 लाख रुपए का इनाम घोषित था, जबकि दशमती कोवाची, सुकाय उर्फ रोशनी पोयाम, चैतराम उसेण्डी उर्फ रूषी, गंगू पोयाम और शारी उर्फ गागरी कोवाची पर 1-1 लाख रुपये का इनाम था। ये सभी लंबे समय से माओवादी गतिविधियों में लिप्त थे और कई घटनाओं में शामिल रहे थे।

प्रोत्साहन राशि और पुनर्वास की सुविधा

सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों को 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है और पुनर्वास के लिए विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भी दिया जाएगा।

110 माओवादी इस साल छोड़ चुके हैं रास्ता

साल 2025 की शुरुआत से अब तक कुल 110 माओवादी, छोटे और बड़े कैडर के, आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह संख्या यह दर्शाती है कि राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति नक्सलियों के खिलाफ असरदार साबित हो रही है।

नक्सलियों की मानवविरोधी सोच से टूट रहा विश्वास

स्थानीय आदिवासियों के बीच नक्सलियों की खोखली विचारधारा, हिंसा, अत्याचार और बाहरी माओवादियों द्वारा हो रहे भेदभाव ने भी कई नक्सल समर्थकों का मन बदलने में भूमिका निभाई है। पुलिस के बढ़ते प्रभाव और सुरक्षा कैंपों की लगातार उपस्थिति से अब नक्सलवाद धीरे-धीरे अपनी पकड़ खोता जा रहा है।

निष्कर्ष
यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ में शांति बहाली की दिशा में एक अहम कदम है, और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में और भी माओवादी मुख्यधारा में लौटकर समाज के निर्माण में सहयोग देंगे।