पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए अब तक हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। कॉलेज के डीन ने इस गंभीर समस्या को देखते हुए टैगोर नगर स्थित विधायक विश्राम गृह को हॉस्टल में बदलने का प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को पत्र के माध्यम से भेजा है। पत्र के बाद कॉलेज की वार्डन टीम ने स्थल का निरीक्षण भी किया।
इस समय नए हॉस्टल का निर्माण कार्य अधूरा है, जबकि पुराने हॉस्टल को तोड़ दिया गया है। ऐसे में एडमिशन प्रक्रिया अगस्त से शुरू होने जा रही है, और 150 से अधिक छात्रों को रहने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। छात्र और छात्राएं फिलहाल देवेंद्रनगर के निजी मकानों में रह रहे हैं, जहां उन्हें 5,000 से 8,000 रुपये तक किराया देना पड़ रहा है।
कॉलेज प्रशासन पिछले एक साल से सुविधायुक्त आवास की तलाश में जुटा है। डीन ने फुंडहर स्थित कामकाजी महिलाओं के हॉस्टल का निरीक्षण भी किया था, लेकिन वहां कोई कमरा उपलब्ध नहीं होने से उन्हें निराशा हाथ लगी। इसके अलावा देवेंद्रनगर और आसपास के इलाकों में भी उपयुक्त जगह नहीं मिल सकी।
अगर विधायक विश्राम गृह को हॉस्टल के रूप में उपयोग की अनुमति मिलती है, तो छात्रों के लिए बस सेवा, सुरक्षा और वार्डन की व्यवस्था भी की जाएगी।
पूर्व में पुराने स्वास्थ्य संचालनालय भवन को हॉस्टल में बदलने की योजना थी, लेकिन वहां अब तहसील कार्यालय स्थानांतरित हो चुका है। इसी तरह नवा रायपुर शिफ्ट हुए डीएमई कार्यालय भवन को भी हॉस्टल के रूप में विकसित करने की योजना बनी थी, परंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस भवन में लगभग 20 बड़े कमरे हैं, जो छात्रों के रहने के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं। हालांकि, ग्राउंड फ्लोर पर पैरामेडिकल डायरेक्टर और प्रथम तल पर नर्सिंग काउंसिल का दफ्तर संचालित हो रहा है। इन्हें स्थानांतरित कर भवन को हॉस्टल में बदले जाने की योजना है।
एमबीबीएस पाठ्यक्रम में गरीब और जरूरतमंद छात्र भी प्रवेश लेते हैं, जिन्हें महंगे किराए के कारण आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। जब तक नया हॉस्टल पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था को शीघ्र लागू करना अनिवार्य हो गया है।