Home Chhattisgarh news Bilaspur news हाईकोर्ट का अहम फैसला: सिर्फ रिश्वत की रकम मिलना दोष साबित करने के लिए काफी नहीं

हाईकोर्ट का अहम फैसला: सिर्फ रिश्वत की रकम मिलना दोष साबित करने के लिए काफी नहीं

0
हाईकोर्ट का अहम फैसला: सिर्फ रिश्वत की रकम मिलना दोष साबित करने के लिए काफी नहीं

बिलासपुर, जुलाई 2025।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक भ्रष्टाचार के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को केवल उसके पास से नकद राशि बरामद होने के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक यह सिद्ध न हो कि वह रकम रिश्वत के रूप में ली गई थी।

यह निर्णय हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा ने सुनाया। इस फैसले के तहत आदिम जाति कल्याण विभाग में कार्यरत रहे कर्मचारी लवन सिंह चुरेंद्र को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। उन्हें पहले एसीबी की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी ठहराकर दो-दो साल की सजा सुनाई थी।

क्या था मामला?

गरियाबंद जिले के मदनपुर के एक प्राथमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षक बैजनाथ नेताम ने वर्ष 2013 में एसीबी से शिकायत की थी कि लवन सिंह चुरेंद्र ने हॉस्टल छात्रों की छात्रवृत्ति की स्वीकृति के लिए उससे ₹10,000 की रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने ₹2,000 पहले ही दे दिए थे, जबकि ₹8,000 बाद में देने का वादा किया। बाद में उसने एसीबी रायपुर में शिकायत दर्ज करवाई।

1 फरवरी 2013 को ट्रैप कार्रवाई में एसीबी ने आरोपी के पास से ₹8,000 बरामद किए। आरोपी के हाथ धुलवाने पर गुलाबी रंग भी निकला, जिसे बतौर सबूत कोर्ट में पेश किया गया। ट्रायल के बाद एसीबी कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दो-दो साल की सजा दी थी।

हाईकोर्ट में बदला फैसला

आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की और वहां कई अहम तर्क रखे गए:

  • आरोपी के पास छात्रवृत्ति स्वीकृत करने का अधिकार नहीं था।

  • शिकायतकर्ता खुद पूर्व में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप में जांच के घेरे में था और आरोपी ने ही उसके खिलाफ रिपोर्ट बनाई थी।

  • रिकॉर्डेड बातचीत में रिश्वत की सीधी मांग का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं था।

  • केवल नोट मिलना, रिश्वत साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों के पीछे व्यक्तिगत दुश्मनी की संभावना भी हो सकती है। इसके साथ ही यह भी जोड़ा गया कि रिश्वत मांगी गई, इसका ठोस और निर्णायक प्रमाण पेश नहीं किया गया।

निष्कर्ष:

हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा कि जब तक यह स्पष्ट न हो कि आरोपी ने रकम अपनी मर्जी से रिश्वत के तौर पर ली है, तब तक उसे दोषी नहीं माना जा सकता। संदेह का लाभ देते हुए लवन सिंह चुरेंद्र को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।