कवर्धा: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में लगातार तीन दिनों से हो रही भारी बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है। सावन की झड़ी ने जिले के खेतों और जलस्रोतों को लबालब कर दिया है। पहले जहां बारिश की कमी से खेती प्रभावित हो रही थी, वहीं अब खेतों में भरपूर पानी पहुंचने से किसान खुश हैं। धान की रोपाई और बुवाई का काम लगभग पूरा हो चुका है, और अब किसान बियासी कार्य में तेजी से जुट गए हैं।
खेतों में पानी लबालब, नदियां-नाले उफान पर
जिलेभर में तीन दिनों में औसतन 80 मिमी से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। पंडरिया, बोड़ला, कुकदुर और रेंगाखारकला तहसीलों में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे वहां की नदियां और नाले उफान पर आ गए हैं। खेतों में पानी इतना भर गया है कि वह छलकने लगा है। जो किसान पहले कम बारिश की वजह से बुआई में पिछड़ गए थे, अब उन्होंने राहत की सांस ली है।
20% से अधिक बियासी कार्य पूरा
बारिश की स्थिति इतनी बेहतर हुई है कि अब तक जिले में 20 फीसदी बियासी का काम भी पूरा किया जा चुका है। किसानों को उम्मीद है कि इस बार धान का उत्पादन अच्छा रहेगा। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में धान की खेती का लक्ष्य 86,000 हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन अब तक 89,200 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल ली जा चुकी है, जो कि लक्ष्य से 3.72 प्रतिशत अधिक है।
पिपरिया में सर्वाधिक बारिश
इस बार जिले में सबसे अधिक बारिश पिपरिया तहसील में हुई है, जहां 602.8 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई। इसके बाद कुकदुर में 590.3 मिमी, रेंगाखारकला में 531.5 मिमी, बोड़ला में 476.1 मिमी और कवर्धा में 405.7 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं, पंडरिया में 284 मिमी, सहसपुर लोहारा में 273.4 मिमी और कुंडा में मात्र 26.2 मिमी औसत वर्षा हुई।
शुरुआती मानसून ने किया निराश, अब मिली राहत
मानसून की शुरुआत में बारिश कम होने से किसान चिंतित थे, लेकिन सावन के आते ही मौसम ने करवट ली और लगातार बारिश ने खेतों को संजीवनी दे दी। कृषि विभाग का कहना है कि अब तक हुई बारिश औसतन 19 प्रतिशत अधिक है, जिससे फसलों के बेहतर उत्पादन की उम्मीद की जा रही है।
नुकसान की आशंकाजहां एक ओर धान, कोदो, अरहर, उड़द और मक्का जैसी फसलों की स्थिति अच्छी बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रही बारिश से सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है। विभाग के अनुसार जिले में 13,000 हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती हो चुकी है, लेकिन अत्यधिक नमी इसकी गुणवत्ता पर असर डाल सकती है।
निष्कर्ष: कुल मिलाकर, कवर्धा जिले में सावन की बारिश ने जहां किसानों को राहत दी है, वहीं फसल उत्पादन को लेकर आशाएं भी जगा दी हैं। यदि मौसम ऐसे ही बना रहा, तो जिले में इस बार बेहतर कृषि उत्पादन देखने को मिल सकता है।