Home Chhattisgarh news सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों के नियमों में बड़ा बदलाव, तीन साल गैरहाजिरी पर मानी जाएगी सेवा समाप्त

सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों के नियमों में बड़ा बदलाव, तीन साल गैरहाजिरी पर मानी जाएगी सेवा समाप्त

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सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों के नियमों में बड़ा बदलाव, तीन साल गैरहाजिरी पर मानी जाएगी सेवा समाप्त

राज्य सरकार ने अपने 4 लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अवकाश संबंधी नियमों में संशोधन कर नया ढांचा तैयार किया है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी लगातार तीन वर्षों तक बिना अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो इसे स्वैच्छिक इस्तीफा मान लिया जाएगा। हालांकि, ऐसा कर्मचारी यदि पुनः सेवा में लौटना चाहता है तो उसे राज्यपाल की अनुमति लेनी होगी।

पूर्व में यह अवधि पाँच वर्षों की थी, जिसे अब घटाकर तीन साल कर दिया गया है। साथ ही, राज्यपाल के इस निर्णयात्मक अधिकार को अब मंत्रिपरिषद द्वारा निभाया जा सकेगा। इस बाबत मंगलवार को मंत्रालय से नए आदेश जारी किए गए।

बिना अनुमति महीने भर की अनुपस्थिति पर दंड तय

अगर कोई कर्मचारी बिना अनुमति के एक महीने से अधिक अनुपस्थित रहता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी और दंड भी लगाया जाएगा। अब मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर भी अर्धवेतन अवकाश को लघुकृत अवकाश में बदलने की सीमा तय कर दी गई है। पूरे सेवाकाल में बिना मेडिकल प्रमाणपत्र के 180 दिन से ज्यादा अर्धवेतन अवकाश को लघुकृत अवकाश नहीं माना जाएगा।

महिला कर्मचारियों को संतान पालन हेतु अधिकतम 730 दिन की छुट्टी

18 वर्ष से कम उम्र के दो बच्चों के पालन-पोषण के लिए महिला कर्मचारियों को अधिकतम 730 दिनों की छुट्टी दी जा सकेगी। यह अवकाश एक कैलेंडर वर्ष में तीन बार से अधिक नहीं लिया जा सकता, जबकि न्यूनतम सीमा पांच दिन रखी गई है। अवकाश के पहले और बाद में आने वाले सप्ताहिक या राजपत्रित अवकाश स्वतः उसमें शामिल हो जाएंगे।

अर्जित अवकाश और अर्धवेतन अवकाश की नई व्यवस्था

अर्जित अवकाश संचय की अधिकतम सीमा 300 दिन होगी और एक बार में अधिकतम 180 दिन तक की छुट्टी ही मंजूर की जा सकेगी। यदि अपरिहार्य परिस्थितियों में इससे अधिक की आवश्यकता होती है, तो मामला वित्त विभाग को भेजा जाएगा। वहीं, अर्धवेतन अवकाश की पात्रता वर्ष में 20 दिन की होगी, जिसे दो किस्तों में – 1 जनवरी और 1 जुलाई को – जमा किया जाएगा।

विशेष प्रावधान और स्पष्टताएं

जीएडी सचिव मुकेश कुमार बंसल ने स्पष्ट किया कि ये नियम न्यायालय द्वारा निर्धारित व्यवस्था पर लागू नहीं होंगे। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे समय-समय पर लंबित छुट्टी मामलों की समीक्षा करें ताकि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

अन्य अहम बातें:

  • अदेय अवकाश: पूरे सेवाकाल में अधिकतम 360 दिन तक लिया जा सकेगा, जिसमें से एक बार में 90 और बिना मेडिकल सर्टिफिकेट के 180 दिन तक स्वीकृत हो सकते हैं।

  • प्रसूति अवकाश: दो बच्चों वाली महिला कर्मचारी को 180 दिनों तक का प्रसूति अवकाश मिलेगा।

  • सेवा के लिए अयोग्यता या मृत्यु की स्थिति में: अवकाश वेतन की वसूली नहीं की जाएगी।

संविधान के अनुच्छेद 166 के तहत राज्यपाल को शासन संचालन हेतु नियम बनाने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन अब मंत्रिपरिषद उनके स्थान पर निर्णय लेने में सक्षम होगी।

चंद्रहास बेहार, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी