बीजापुर/भोपालपटनम।
भोपालपटनम के कन्या छात्रावास में 12वीं कक्षा की एक नाबालिग आदिवासी छात्रा के गर्भवती पाए जाने की घटना ने जिलेभर में हड़कंप मचा दिया है। मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। शनिवार को कांग्रेस की नौ सदस्यीय जांच समिति ने भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी के नेतृत्व में छात्रावास का निरीक्षण किया और छात्राओं, स्टाफ, शिक्षकों और चिकित्सकों से जानकारी जुटाई।
प्रेसवार्ता में विधायक का बड़ा आरोप
जांच के बाद बीजापुर में आयोजित प्रेसवार्ता में विधायक सावित्री मंडावी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रा के साथ हुए अन्याय को छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि छात्रा की गर्भावस्था को अधीक्षक और अन्य अधिकारियों द्वारा जानबूझकर छिपाया गया, और परिजनों को दबाव में रखकर छात्रा को चुपचाप घर भेजने की कोशिश की गई।
मंडावी ने कहा कि अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच समिति को पीड़िता के परिवार से मिलने से रोका गया।
भाजपा सरकार पर भी निशाना
विधायक मंडावी ने कहा कि भाजपा के शासन में आदिवासी, महिलाएं, किसान और युवा खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर जनआंदोलन करेगी।
विक्रम मंडावी ने भी जताई नाराज़गी
बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने भी इस मामले में प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर समय रहते न्याय नहीं मिला तो कांग्रेस जनसमर्थन के साथ सड़कों पर उतरेगी।
कांग्रेस ने गठित की जांच समिति
इस मामले की गहन जांच के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने विधायक सावित्री मंडावी के नेतृत्व में एक नौ सदस्यीय समिति बनाई, जिसमें दंतेवाड़ा की पूर्व विधायक देवती कर्मा, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री नीना रावतिया, सरिता चापा, गीता कमल, निर्मला मरपल्ली, रिंकी कोरम, पार्वती कश्यप और अनिता तेलम को शामिल किया गया।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
जांच दल के सदस्यों ने कहा कि यह घटना प्रशासनिक लापरवाही की बानगी है और छात्रावासों में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।
इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष लालू राठौर, दंतेवाड़ा जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा, महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता और अन्य स्थानीय नेता भी मौके पर मौजूद थे।
यह घटना न सिर्फ एक छात्रा के भविष्य से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे तंत्र पर सवाल खड़े करती है कि आदिवासी अंचलों में बेटियों की सुरक्षा किसके भरोसे है?