छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। जिले में सक्रिय 14 कुख्यात नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है, जिनमें 5 महिलाएं भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 16 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें से कई नक्सली संगठन के अहम पदों पर तैनात थे।
सरेंडर की प्रेरणा बनी सरकारी योजना
नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ और सुकमा पुलिस की ‘नियदनेल्लानार’ पहल से प्रेरित होकर सरेंडर किया। आत्मसमर्पण करने वालों में कुहरम भीमा (इनामी ₹2 लाख), तेलाम हिड़मा (नागाराम आरपीसी अध्यक्ष, इनामी ₹2 लाख), माड़वी पोज्जे, पोड़ियाम आयते, माड़वी मंगड़ी, सोड़ी सोना, मड़कम हुंगी, रवा लखे, गोंगे आयता, सोड़ी केसा, कुंजाम गंगा, माड़वी मूका, माड़वी देवा उर्फ पाड़ा देवा और तेलाम पोज्जा शामिल हैं।
बिना हथियार आत्मसमर्पण
ये सभी नक्सली बिना हथियार के एसपी किरण चव्हाण, सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य पुलिस अफसरों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण के लिए सामने आए।
मुठभेड़ का डर बना आत्मसमर्पण की वजह
सुकमा के एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि सरकार की पुनर्वास नीति और पुलिस की रणनीति के चलते नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं। सुरक्षा बलों के कैम्प अब जंगलों के भीतर भी स्थापित हो चुके हैं, जिससे नक्सलियों में डर बढ़ा है और वे मारे जाने के भय से सरेंडर का रास्ता अपना रहे हैं।
पुनर्वास के तहत मिलेंगी सुविधाएं
सरकार की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि, कपड़े, आवश्यक सामान और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। इसके साथ ही उनका सामाजिक पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जाएगा।