Home Chhattisgarh news खस्ताहाल सिस्टम की पोल खोलती बारिश: जनता त्रस्त, प्रशासन मस्त

खस्ताहाल सिस्टम की पोल खोलती बारिश: जनता त्रस्त, प्रशासन मस्त

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खस्ताहाल सिस्टम की पोल खोलती बारिश: जनता त्रस्त, प्रशासन मस्त

रायपुर  राजधानी में शनिवार रात हुई मूसलधार बारिश ने नगर निगम और प्रशासन की तैयारियों की असलियत उजागर कर दी। बीते 24 घंटे में 134.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 2013 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी बारिश है। रात 12 बजे से सुबह 8:30 बजे तक सिर्फ साढ़े आठ घंटे में शहर जलमग्न हो गया।

बारिश इतनी तेज थी कि प्रोफेसर कॉलोनी के सेक्टर-1 से 5 तक के घर पानी में डूब गए। हालात ऐसे हो गए कि नाराज स्थानीय लोग नेशनल हाईवे-53 पर उतर आए और चक्का जाम कर दिया। करीब 4 घंटे तक जाम की वजह से पूरे शहर की रफ्तार थम गई।

जलजमाव से जनजीवन अस्त-व्यस्त
दलदल सिवनी के जब्बार नाले का जलस्तर बढ़ गया, जिससे ऑक्सीजोन और साइंस सिटी के आसपास की कॉलोनियों की सड़कें बंद हो गईं। एक कार नाले के तेज बहाव में बह गई। कुशालपुर में दो फीट पानी भर गया, जिससे एक बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया तक बाधित हो गई। परिजनों को शव को अन्य स्थान पर शिफ्ट करना पड़ा।

जाम में फंसी एंबुलेंस और यात्री
प्रोफेसर कॉलोनी के जाम में सिमगा के एक मरीज की एंबुलेंस भी फंस गई। पैरालिसिस अटैक आए ओमप्रकाश तंबोली को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन एंबुलेंस एक घंटे तक जाम में अटकी रही। वहीं भिलाई से मस्कट जा रहे शकील अहमद को भी टैक्सी से एयरपोर्ट भागना पड़ा, क्योंकि उनकी इनोवा जाम में फंसी थी।

प्रशासन की रस्मअदायगी
बारिश के बाद महापौर मीनल चौबे और निगम कमिश्नर विश्वदीप प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने पहुंचे। दोनों ने पानी में उतरकर हालात का जायजा लिया और कहा कि जल्द ही एक्सपर्ट आर्किटेक्ट्स की टीम गठित की जाएगी।

तकनीकी कारणों की भी भरमार
सेवानिवृत्त इंजीनियर एसवी पडेगांवकर ने बताया कि शहर की सड़कें बिना योजना के बनाई जा रही हैं। नालियां सही डिजाइन में नहीं बनतीं, जिससे पानी की निकासी बाधित होती है। वी शेप की नालियां और सड़क के मध्य भाग को कुछ मिलीमीटर ऊंचा करने से जलभराव की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है।

पुराना ड्रेनेज सिस्टम बन रहा मुसीबत
शहर की ड्रेनेज व्यवस्था दशकों पुरानी है, जिसमें 60-70% पाइपलाइनें जाम पड़ी हैं। नतीजा यह होता है कि बारिश का पानी सड़कों और घरों में वापस घुस जाता है। नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही और अतिक्रमण भी हटाने में गंभीरता नहीं बरती जा रही।

नतीजाजनता अपने टैक्स से सड़कें, नालियां बनवाती है, लेकिन जब मुसीबत आती है तो वही जनता परेशान होती है। जिम्मेदार अफसर दौरों, मीटिंगों और टेंडरों में व्यस्त हैं, और शहर हर बारिश में डूबता है।