Home Chhattisgarh news Bemetara news जर्जर स्कूल भवन की अनदेखी भारी पड़ी, छत का प्लास्टर गिरा, मंदिर में पढ़ने को मजबूर छात्र

जर्जर स्कूल भवन की अनदेखी भारी पड़ी, छत का प्लास्टर गिरा, मंदिर में पढ़ने को मजबूर छात्र

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जर्जर स्कूल भवन की अनदेखी भारी पड़ी, छत का प्लास्टर गिरा, मंदिर में पढ़ने को मजबूर छात्र

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम झिरिया में संचालित मिडिल स्कूल की बदहाली अब सामने आ चुकी है। बीते तीन दिन पहले रात में स्कूल की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त स्कूल में कोई मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन इसके बाद से विद्यालय भवन को असुरक्षित मानते हुए बच्चों की पढ़ाई गांव के मंदिर परिसर में कराई जा रही है।

विद्यालय के प्रधान पाठक को सुबह सफाईकर्मियों ने सूचना दी, जब वे स्कूल परिसर पहुंचे तो भवन की हालत देख दंग रह गए। तब से करीब 135 छात्र मंदिर में तीन अलग-अलग कक्षाओं में अध्ययन कर रहे हैं। यह मंदिर शिवनाथ नदी के किनारे स्थित है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

शिक्षकों ने दी थी कई बार जानकारी, लेकिन प्रशासन रहा उदासीन

बताया जा रहा है कि स्कूल भवन की जर्जर हालत की जानकारी समय-समय पर ब्लॉक और जिला शिक्षा अधिकारियों को दी जाती रही, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब जब हादसा होते-होते बचा, तब यह मामला सुर्खियों में आया है।

90 करोड़ का हिसाब गायब, फर्जीवाड़े की जांच अधूरी

इस मुद्दे पर जिला पंचायत सदस्य हरीश साहू ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्कूल भवनों की मरम्मत और अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए जिले को 90 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी थी। लेकिन इस राशि का न तो सही उपयोग हुआ और न ही इसका कोई हिसाब सार्वजनिक किया गया।

साहू का कहना है कि नवागढ़ क्षेत्र में यह तीसरा स्कूल है, जो “जुगाड़ू शिक्षा व्यवस्था” से चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि झिरिया की घटना तो केवल एक झलक है, असली तस्वीर पूरे जिले में देखने को मिलेगी।

जांच के आदेश के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं

गौरतलब है कि जनवरी 2024 में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने स्कूल जतन योजना में गड़बड़ी को लेकर जांच का आदेश दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी जुलाई 2024 में जांच के निर्देश जारी किए। 8 जुलाई को स्कूल शिक्षा सचिव ने सभी जिलों के कलेक्टरों से रिपोर्ट तलब की थी।

बजट सत्र के दौरान विधायक धरमलाल कौशिक ने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने बताया कि जांच प्रक्रिया जारी है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि आदेश जारी होने के एक साल बाद भी न जांच पूरी हुई और न ही दोषियों पर कोई कार्रवाई की गई। बेमेतरा के डीईओ ने भी यह स्वीकार किया कि जांच रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। एसडीएम नवागढ़ द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को भी अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया।

निष्कर्ष

झिरिया गांव का यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे लाखों-करोड़ों की योजनाएं फाइलों में सिमटकर रह जाती हैं और जमीनी स्तर पर बच्चे सुरक्षित शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। जब तक जांच और जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसी घटनाएं दोहराने की आशंका बनी रहेगी।