Home Chhattisgarh news दशक पुराने भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला: दो सरकारी अधिकारी दोषी करार, 16-16 साल की सजा

दशक पुराने भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला: दो सरकारी अधिकारी दोषी करार, 16-16 साल की सजा

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दशक पुराने भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला: दो सरकारी अधिकारी दोषी करार, 16-16 साल की सजा

दंतेवाड़ा (CG News): दंतेवाड़ा जिला अदालत ने एक दशक पुराने बहुचर्चित भ्रष्टाचार मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश विजय कुमार होता की अदालत ने लोक निर्माण विभाग (PWD) सुकमा के दो पूर्व अधिकारियों — कार्यपालक अभियंता चोवाराम पिस्दा और उप अभियंता (प्रभारी एसडीओ) ज्ञानेश कुमार तारम — को दोषी ठहराते हुए 16-16 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

क्या है मामला?

यह मामला वर्ष 2010-11 का है, जब केंद्र सरकार की एलडब्ल्यूई योजना के तहत सुकमा जिले में चिंतलनार से मरईगुड़ा तक सड़क निर्माण का ठेका नीरज सीमेंट स्ट्रक्चर लिमिटेड, मुंबई के ठेकेदार मदिना मोहम्मद को दिया गया था। आरोप है कि परियोजना से जुड़े दोनों शासकीय अधिकारियों ने ठेकेदार से सांठगांठ कर माप पुस्तिका (Measurement Book) में हेराफेरी की। उन्होंने कार्य से अधिक माप दर्शाते हुए फर्जी बिल तैयार किए, जिसके आधार पर ठेकेदार को 2 करोड़ 84 लाख 6 हजार 785 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

FIR से लेकर सजा तक का सफर

मामले की प्रारंभिक जांच के बाद 5 सितंबर 2012 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। लंबी जांच प्रक्रिया और अदालती कार्यवाही के बाद 29 जुलाई 2019 को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 19 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने 16 जुलाई 2025 को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं में कुल 16 वर्षों की सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

न्यायिक टिप्पणी

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी पद पर रहते हुए सार्वजनिक धन का इस प्रकार दुरुपयोग एक गंभीर अपराध है, जिससे न केवल शासन व्यवस्था की छवि धूमिल होती है बल्कि जनविश्वास भी टूटता है।

यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत संदेश माना जा रहा ह