Home Chhattisgarh news महंगाई भत्ते की बकाया किश्त न मिलने से पूर्व-सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सबसे अधिक आर्थिक नुकसान

महंगाई भत्ते की बकाया किश्त न मिलने से पूर्व-सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सबसे अधिक आर्थिक नुकसान

0
महंगाई भत्ते की बकाया किश्त न मिलने से पूर्व-सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सबसे अधिक आर्थिक नुकसान

रायपुर: सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते (डीए) की लंबित किश्त न मिलने से भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस कारण उनकी ग्रेच्युटी और पेंशन पर भी असर पड़ रहा है। सरकारी सेवा नियमों के अनुसार कर्मचारियों के वेतन में हर साल न्यूनतम तीन प्रतिशत की वृद्धि होती है।

ग्रेच्युटी और पेंशन की गणना में महंगाई भत्ते की भूमिका अहम होती है। वर्ष 2019 से अगस्त 2025 तक डीए की बकाया किश्त न मिलने से कर्मचारियों को लगभग 21 प्रतिशत का अतिरिक्त नुकसान हुआ है।

कर्मचारी संगठन उठा रहे सवाल
शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी और कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने सरकार से सवाल किया कि बजट में डीए के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया था। यदि किया गया था, तो कर्मचारियों को भुगतान क्यों नहीं हुआ और यह पैसा कहां गया।

पूर्व-सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सबसे अधिक नुकसान
जीएडी के पूर्व उप सचिव केके वाजपेयी के अनुसार, डीए और एरियर्स का भुगतान वेतन-भत्तों के बजट प्रावधान से किया जाता है। बकाया एरियर्स न मिलने से कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है, खासकर उन लोगों को जो पहले से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

ग्रेच्युटी और पेंशन की गणना का तरीका
यदि किसी कर्मचारी की न्यूनतम 33 साल की सेवा है, तो उसकी ग्रेच्युटी की गणना 16.5 साल की सेवा अवधि को अंतिम मूल वेतन और डीए के जोड़ से गुणा करके की जाती है। ग्रेच्युटी की अधिकतम राशि 20 लाख रुपए है।

पेंशन की गणना में अंतिम मूल वेतन का आधा और डीए के जोड़ से कुल सेवा की आधी अवधि को गुणा किया जाता है। इस आधार पर, डीए की बकाया राशि न मिलने के कारण कर्मचारियों को विभिन्न सेवा अवधियों (4 वर्ष, 10 वर्ष, 15 वर्ष, 20 वर्ष या उससे अधिक) के हिसाब से लाखों रुपए का नुकसान हो चुका है।