Home Chhattisgarh news जवाब दे सकती है सीटी स्कैन मशीन, नई मशीनों के लिए नहीं मिल रहा फंड – मेडिकल कॉलेज की जांच सेवाएं प्रभावित

जवाब दे सकती है सीटी स्कैन मशीन, नई मशीनों के लिए नहीं मिल रहा फंड – मेडिकल कॉलेज की जांच सेवाएं प्रभावित

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जवाब दे सकती है सीटी स्कैन मशीन, नई मशीनों के लिए नहीं मिल रहा फंड – मेडिकल कॉलेज की जांच सेवाएं प्रभावित

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन और अन्य जांच मशीनों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस सरकार के दौरान कॉलेज को नई मशीनों की खरीदी और उनके रखरखाव के लिए महज 30.95 करोड़ रुपये का फंड मिला। यह राशि प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान की जरूरतों के मुकाबले बेहद कम मानी जा रही है।

कॉलेज प्रशासन के अनुसार, आमतौर पर हर वर्ष इस तरह की मशीनों और उपकरणों के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। लेकिन 2018 से 2023 के बीच फंड की भारी कमी रही। यहां तक कि तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर छात्रों की फीस और मरीजों से प्राप्त शुल्क (स्वशासी मद) से ही मशीनों की जरूरतें पूरी की जाएं। इस फंड का उपयोग पहले से संविदा डॉक्टरों की सैलरी और अन्य जरूरी खर्चों के लिए किया जाता रहा है।

मशीनें हुईं कंडम, मरीजों को निजी लैब का सहारा

कॉलेज और उससे जुड़े आंबेडकर अस्पताल में सीटी सिम्युलेटर, सीटी इंजेक्टर, एक्सरे मशीनें, थ्रीडी इको और सी-आर्म जैसी कई मशीनें या तो खराब हैं या पूरी तरह कंडम हो चुकी हैं। 13 साल पुरानी सीटी स्कैन मशीन भी बार-बार खराब हो रही है। इसके गर्म हो जाने या पार्ट्स फेल होने की समस्या लगातार बनी हुई है।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नई मशीनें नहीं खरीदी गईं, तो मरीजों की जांच प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो सकती है। वर्तमान में कई मरीजों को बाहर निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर जाकर महंगी जांच करानी पड़ रही है।

मेडिसिन विभाग में भी ठप पड़ी जांच सेवाएं

मेडिसिन विभाग की इको कार्डियोग्राफी मशीन 15 साल पुरानी है और अब काम नहीं कर रही। इससे विभाग के डॉक्टर मरीजों की इको जांच नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि अब कार्डियोलॉजी विभाग में पांच विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो कभी-कभी मरीजों की जांच कर लेते हैं। विभाग ने डीएम कोर्स के लिए भी आवेदन किया है, लेकिन बुनियादी उपकरणों की कमी उसमें बाधा बन सकती है।

सीजीएमएससी पर टेंडर में देरी का आरोप

प्रबंधन का कहना है कि जरूरी मरम्मत और नई मशीनों की खरीदी के लिए बार-बार सीजीएमएससी को पत्र भेजे गए, लेकिन समय पर टेंडर प्रक्रिया नहीं हो पाई। जैसे कि सीटी इंजेक्टर मशीन सवा साल से खराब पड़ी है, परंतु महज 15 लाख रुपए का बजट न मिलने से उसे ठीक नहीं किया जा सका है।

वर्षवार फंड का विवरण (2018-23):

2018-19 : ₹16.50 करोड़

2019-20 : ₹0

2020-21 : ₹14.45 करोड़

2021-22 : ₹0

2022-23 : ₹0

कुल : ₹30.95 करोड़

अब मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और प्रबंधन नई मशीनों के लिए फंड की मांग कर रहे हैं, ताकि इलाज और जांच की सुविधाएं पुनः सुचारु रूप से शुरू हो सकें। मरीजों की सुविधाओं के लिए समय रहते कार्रवाई जरूरी है, वरना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर असर पड़ सकता है।