छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मतांतरण को लेकर विवादों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बीते चार वर्षों में राज्य में ऐसे 102 घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें हिंदू और ईसाई समुदायों के बीच तनाव की स्थिति बनी। ताजा मामला 25 जुलाई का है, जब दुर्ग रेलवे स्टेशन से तीन युवतियों के कथित धर्मांतरण और मानव तस्करी से जुड़े मामले में दो ईसाई ननों और एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इस घटना ने न केवल राज्य की राजनीति को गर्माया, बल्कि संसद तक इसकी गूंज पहुंची।
इन मामलों में पुलिस ने अब तक कुल 44 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं, जिनमें 23 अकेले 2025 में ही दर्ज हुईं। फिलहाल प्रदेश के 17 जिलों में धर्मांतरण से जुड़े मामले चल रहे हैं। सबसे ज्यादा विवाद कोरबा, बलरामपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर जिलों में हुए हैं, जबकि सरगुजा, बस्तर और सूरजपुर जैसे इलाकों में ऐसे मामले कम सामने आए हैं।

प्रमुख घटनाएं:
1. रायपुर – अस्थायी चर्च का घेराव:
27 जुलाई को रायपुर के डब्ल्यूआरएस कॉलोनी स्थित प्रवेश रोड पर रेलवे की जमीन पर बनाए गए एक अस्थायी चर्च को हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने घेर लिया। आरोप लगाया गया कि वहां प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण किया जा रहा है।
2. बिलासपुर – सभा में मतांतरण का आरोप:
28 जुलाई को बिलासपुर के बंदवापारा क्षेत्र स्थित प्रीति भवन में हिंदू संगठनों ने सभा के दौरान विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सभा में हिंदू महिलाओं को मानसिक रूप से ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
3. रायपुर – चंगाई सभा में बवाल:
31 जनवरी 2025 को रायपुर के पंडरी इलाके में आयोजित एक चंगाई सभा में धर्मांतरण और हिंदू देवी-देवताओं के कथित अपमान को लेकर विवाद हुआ। हिंदू संगठनों ने दावा किया कि सभा में चार हिंदू परिवारों को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया गया। इस मामले में पादरी कीर्ति केशरवानी समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
इन घटनाओं ने राज्य में धार्मिक संतुलन और सामाजिक समरसता को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है।