बस्तर। बुधवार सुबह से जारी बारिश के बीच कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राज्य सरकार द्वारा स्कूलों और शिक्षकों के “युक्तियुक्तकरण” (rationalization) नीति के विरोध में किया गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे शिक्षा विरोधी कदम बताते हुए राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
स्कूल बंदी के खिलाफ कांग्रेस का विरोध
बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले 45 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था, लेकिन अब वह 10 हजार से ज्यादा स्कूलों को बंद करने जा रही है। उन्होंने सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल बंद न करने की बात कही जा रही है, जबकि जमीनी सच्चाई कुछ और है। मौर्य के मुताबिक, यह निर्णय दूरदराज के क्षेत्रों—जैसे बस्तर, सरगुजा और जशपुर—की शिक्षा व्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाएगा।
शिक्षक भर्ती नहीं, पद खत्म किए जा रहे
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था, लेकिन अब तक केवल 33 हजार की भर्ती हुई है। मौजूदा बजट में 20 हजार और हाल में 5 हजार पदों की घोषणा की गई है, मगर 45 हजार शिक्षक पद खत्म कर दिए गए हैं। इससे न केवल शिक्षकों का भविष्य अंधकारमय हो गया है, बल्कि बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
“शिक्षा व्यवस्था चौपट कर रही सरकार”
कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला ने कहा कि यह नीति शिक्षा के स्तर को गिराएगी। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार के दौरान भी करीब 3,000 स्कूल बंद किए गए थे, जिन्हें कांग्रेस सरकार ने फिर शुरू किया था। लेकिन अब एक बार फिर बिना जनसुनवाई के ऐसा निर्णय लिया जा रहा है।
बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल और कांग्रेस नेता रेखचंद जैन ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने शिक्षा को कभी प्राथमिकता नहीं दी। उल्टा शिक्षकों की भर्ती रोक कर और स्कूल बंद कर शिक्षा की गुणवत्ता को कमजोर किया जा रहा है।
प्रदर्शन में कई वरिष्ठ नेता शामिल
प्रदर्शन में पूर्व विधायक राजमन बेंजाम, चंदन कश्यप, पूर्व महापौर जतिन जायसवाल, जाहिद हुसैन, राजेश राय, बलराम यादव, संतोष सेठिया, लक्षमण कश्यप, बीरसिंह, सहदेव नाग, गणेश बघेल समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने मिलकर राज्य सरकार से नीति वापस लेने की मांग की।