उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद यह पद खाली हो चुका है। इस बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य से किसी वरिष्ठ नेता को यह जिम्मेदारी देने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस पत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल रमेश बैस के नाम की सिफारिश की है।
बैज का तर्क: छत्तीसगढ़ को मिले राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व
दीपक बैज ने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ भाजपा में कई ऐसे अनुभवी नेता हैं जो देश के उपराष्ट्रपति पद के लिए पूरी तरह योग्य हैं। उन्होंने विशेष तौर पर रमेश बैस का उल्लेख किया, जो सात बार सांसद रह चुके हैं और झारखंड, त्रिपुरा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
बैज ने कहा कि केंद्र में बीजेपी को 2014, 2019 और 2024 में भारी समर्थन मिला है, लेकिन इसके बावजूद छत्तीसगढ़ को सिर्फ राज्य मंत्री पद तक सीमित रखा गया। ऐसे में अब छत्तीसगढ़ के किसी नेता को उपराष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
भाजपा का पलटवार: कांग्रेस ने खुद बाहरी लोगों को दिया मौका
कांग्रेस की इस मांग पर भाजपा नेता अमित चिमनानी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा छत्तीसगढ़ को हर स्तर पर प्रतिनिधित्व देने का काम किया है। लेकिन कांग्रेस की तरफ से जब राज्यसभा सीट देने का मौका आया, तब उन्होंने छत्तीसगढ़ के नेताओं को नजरअंदाज कर बाहरी नेताओं को प्राथमिकता दी।
राजनीतिक संदेश और सियासी समीकरण
कांग्रेस की यह चिट्ठी एक ओर जहां छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय मंच पर ज्यादा महत्व दिलाने की मांग है, वहीं यह भाजपा पर दबाव बनाने की एक राजनीतिक रणनीति भी मानी जा रही है। रमेश बैस का नाम आगे करके कांग्रेस ने एक अनुभवी भाजपा नेता को राष्ट्रीय पद दिलाने की मांग करते हुए खुद को प्रदेश हितैषी साबित करने की कोशिश की है।
वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की दोहरी नीति बता रही है, जो खुद जब मौका मिला तो प्रदेश के नेताओं को पीछे रखकर बाहर के लोगों को तरजीह देती रही।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की मांग लंबे समय से उठती रही है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय कांग्रेस के सुझाव को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या छत्तीसगढ़ को पहली बार उपराष्ट्रपति पद पर प्रतिनिधित्व मिल पाता है या नहीं।