Home Chhattisgarh news राजनांदगांव में मुनि वीरभद्र का प्रवचन: इच्छाओं के त्याग और आहार संयम को बताया तप का आधार

राजनांदगांव में मुनि वीरभद्र का प्रवचन: इच्छाओं के त्याग और आहार संयम को बताया तप का आधार

0
राजनांदगांव में मुनि वीरभद्र का प्रवचन: इच्छाओं के त्याग और आहार संयम को बताया तप का आधार

राजनांदगांव में जैन मुनि वीरभद्र ने प्रवचन के दौरान तप और संयम के महत्व पर प्रकाश डाला। 171 दिन के उपवास का रिकॉर्ड बना चुके मुनि ने कहा कि तप का वास्तविक आरंभ इच्छाओं के त्याग से होता है। उन्होंने आहार को जीवन की मूल आवश्यकता बताते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति भोजन का त्याग कर सकता है तो उसके लिए बाकी सारी भौतिक वस्तुएं स्वतः ही महत्वहीन हो जाती हैं।

मुनि वीरभद्र ने समझाया कि तप का मतलब केवल भूख से कम खाना नहीं है, बल्कि भोजन और स्वाद पर नियंत्रण करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि न्यूनतम आहार के सहारे जीवन यापन करना चाहिए। यही तप का सही उद्देश्य है, जिससे मनुष्य के भीतर के राग और आसक्तियां समाप्त होती हैं।

उन्होंने कहा कि क्रियाएं केवल दिखावे या लोक रंजन के लिए नहीं होनी चाहिएं, बल्कि आत्मिक आनंद और आत्म कल्याण के लिए की जानी चाहिएं। मुनि ने लोगों को यह भी संदेश दिया कि भीतर की कठोरता और पशुता जैसे नकारात्मक भावों को त्यागने का यही उचित समय है।

आगे बढ़ते हुए उन्होंने बताया कि आत्म कल्याण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए वायुतप और अभ्यंकर तप दोनों का संयुक्त अभ्यास करना आवश्यक है।

क्या आप चाहेंगे कि मैं इस खबर का एक संक्षिप्त संस्करण (200–250 शब्दों का) भी बना दूं, जैसा अखबारों में छपता है?