मुड़पार (छत्तीसगढ़)। ग्राम मुड़पार में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। यहां एक बंद खदान के पानी से भरे गड्ढे में डूबने से 12 वर्षीय बालक हर्ष यादव पिता राजेश यादव की मौत हो गई। बच्चा तीन दिन से लापता था और शुक्रवार को उसका शव खदान के गड्ढे से बरामद हुआ।
जानकारी के अनुसार, हादसा उस खदान में हुआ जो लगभग 10 साल से बंद है, परंतु उसके गड्ढे को अब तक नहीं भरा गया था। खदान का स्वामित्व कमल अग्रवाल का बताया जा रहा है। आरोप है कि खदान संचालक ने गड्ढा भरने के खर्च से बचने के लिए वहां दिखावे के लिए मछली पालन शुरू किया था, जिसे बाद में चुपचाप बंद कर दिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल और उतई थाना प्रभारी विपिन रंगारी मौके पर पहुंचे। डॉग स्क्वायड की मदद से बच्चे के कपड़े सुंघाकर खोज अभियान शुरू किया गया। दो दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। तीसरे दिन, दूसरे खदान में हर्ष का शव पानी की सतह पर मिला। शव के पास उसके कपड़े भी बरामद किए गए।
सिस्टम की घोर लापरवाही उजागर
खनिज नियमों के अनुसार आबादी क्षेत्र के पास चूना पत्थर की खदान अधिकतम 10 मीटर और मुरुम खदान 7 मीटर गहराई तक ही होनी चाहिए। बावजूद इसके, पाटन और धमधा क्षेत्र की अधिकांश चालू और बंद खदानें 20 से 25 मीटर तक गहरी हैं। जिस खदान में हादसा हुआ, उसकी गहराई भी इतनी ही बताई जा रही है।
सेलूद, पतोरा, चुनकट्टा, मुड़पार, छाटा, गुढियारी, कानाकोट, परसाही, धौराभाठा, बेल्हारी सहित कई इलाकों में इसी तरह के खुले खदानों के कारण हादसे होते रहे हैं, मगर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जताई संवेदना

घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पीड़ित परिवार से मिलने मुड़पार पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और दोषी खदान संचालक पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने भी जमकर नाराजगी जताई और खनन विभाग तथा प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई।
जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने मांग की है कि ऐसी सभी बंद खदानों को तत्काल पाटा जाए और जिम्मेदारों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर कठोर दंड दिया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।