छत्तीसगढ़ सरकार ने 2029 तक पूरे राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल प्रदेश में हर 100 में से करीब 12 मामले बाल विवाह के सामने आते हैं। इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए चरणबद्ध योजना पर काम हो रहा है।
दो साल बिना बाल विवाह, मिलेगा प्रमाण पत्र
सरकार ने तय किया है कि 2023-24 और 2024-25 के दौरान जिन गांवों और शहरों में एक भी बाल विवाह नहीं होगा, उन्हें बाल विवाह मुक्त घोषित कर प्रमाण पत्र दिया जाएगा। यह सर्टिफिकेट जारी करने से पहले जिले का कलेक्टर पूरी जांच करेगा। ग्राम पंचायतों में प्रस्ताव पास होने और ग्राम सभा की मंजूरी के बाद ही यह प्रक्रिया पूरी होगी। नगरीय निकायों में भी सामान्य सभा में चर्चा के बाद कलेक्टर द्वारा सर्टिफिकेट जारी होगा।
शिकायत के लिए पोर्टल और अधिकारी नियुक्त
बाल विवाह की सूचना मिलने पर नागरिक बाल विवाह मुक्त अभियान पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस पोर्टल से महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य संबंधित विभागों के बीच त्वरित कार्रवाई के लिए समन्वय होगा। इसके लिए राज्यभर की 11,664 ग्राम पंचायतों के सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है।
चरणबद्ध लक्ष्य
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2025-26: 40% गांव और शहर बाल विवाह मुक्त
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2026-27: 60%
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2027-28: 80%
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2028-29: 100%
अगले साल तक 4,678 गांव और 77 शहर को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य है।
जमीनी स्तर पर तैनाती
राज्य में 13,794 लोगों की टीम इस अभियान में लगी है, जिसमें 44 जिला कार्यक्रम अधिकारी, 220 बाल विकास परियोजना अधिकारी, 1,886 सेक्टर पर्यवेक्षक और 11,664 ग्राम पंचायत सचिव शामिल हैं।
यह अभियान न केवल कानून के तहत कार्रवाई करेगा, बल्कि सामाजिक जागरूकता के जरिए भी बाल विवाह जैसी प्रथा को खत्म करने पर जोर देगा।