छत्तीसगढ़ में शहरी परिवहन व्यवस्था की बदहाली को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। बिलासपुर शहर में सिटी बसों की खराब स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट में जनहित याचिका के रूप में सुनवाई हो रही है। मंगलवार को चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि बिलासपुर में कुल 9 बसें थीं, जिनमें से 6 तकनीकी रूप से ठीक हैं, लेकिन फिलहाल केवल 5 ही सड़कों पर चल रही हैं। बाकी बसें मरम्मत के बाद फिर से चालू की जाएंगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की यह स्थिति बड़े शहर के लिहाज से बेहद खराब है और सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि वर्ष 2012-13 में शहरी परिवहन की शुरुआत की गई थी। कोविड काल और लॉकडाउन के दौरान बसें बंद रही थीं, जिससे अधिकांश बसें खराब हो गईं और अब उनमें से कई मरम्मत के लायक भी नहीं बचीं। पुरानी बसें लगभग 10 साल पुरानी हो चुकी हैं।
हाईकोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए सख्त लहजे में कहा कि जनता की सुविधा को देखते हुए इस समस्या का शीघ्र समाधान किया जाए। अगली सुनवाई 10 सितंबर को तय की गई है।
इधर, सरकार ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख शहरों — दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर और कोरबा — में 140 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी मिली है। रायपुर के लिए अलग से 100 मिडी ई-बसों की स्वीकृति दी गई है। कुल मिलाकर प्रदेश में 240 ई-बसों के संचालन की योजना है।
इसके लिए केंद्र सरकार से 67.40 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें बस डिपो और बिजली अवसंरचना के लिए 36.62 करोड़ रुपए शामिल हैं। ये सभी कार्य फिलहाल निर्माणाधीन हैं। शासन का अनुमान है कि दिवाली के बाद ई-बसे सड़कों पर दौड़ने लगेंगी, जिससे लोगों को राहत मिलेगी।