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छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार पर गरमाई सियासत: डिप्टी CM अरुण साव बोले – “जनहित के काम से बघेल को पेट में दर्द होता है”

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छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार पर गरमाई सियासत: डिप्टी CM अरुण साव बोले – “जनहित के काम से बघेल को पेट में दर्द होता है”

रायपुर।
छत्तीसगढ़ के डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में जनहित के कार्य होते हैं तो बघेल को पेट में दर्द होता है। कांग्रेस नेताओं को जनसेवा की पहल से तकलीफ होती है क्योंकि उनका जनहित से कोई सरोकार नहीं है। साव ने यह बयान राज्य सरकार के सुशासन तिहार कार्यक्रम पर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में दिया।

जनता के बीच जाएंगे मंत्री, मुख्यमंत्री

डिप्टी सीएम ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार 5 मई से आम जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनकर समाधान करेगी। इस दौरान प्रदेश के सभी मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न जिलों में समाधान शिविर लगाएंगे।

भूपेश बघेल का तंज

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुशासन तिहार को लेकर सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि जब राज्य में नक्सलवाद और पेयजल संकट जैसे गंभीर मुद्दे हैं, तब सरकार उत्सव मना रही है। वे लगातार सोशल मीडिया पर इस विषय में पोस्ट कर रहे हैं।


सुशासन तिहार-2025: 3 चरणों में अभियान

  1. पहला चरण (8-11 अप्रैल): जनता से आवेदन लिए गए।

  2. दूसरा चरण: एक महीने में आवेदनों का निराकरण।

  3. तीसरा चरण (5-31 मई): समाधान शिविर आयोजित होंगे।

अब तक मिले आवेदन

  • कुल प्राप्त आवेदन: 7 लाख+

  • पोर्टल: 1.65 लाख मांग, 19,987 शिकायतें

  • शिविर: 4.5 लाख मांग, 12,695 शिकायतें

  • शिकायत पेटी: 50,336 मांग, 1,690 शिकायतें


समाधान शिविरों की व्यवस्था

  • समय: 5 मई से 31 मई तक

  • स्थान: हर 8 से 15 पंचायतों में

  • नगरीय निकायों में भी आयोजित होंगे

  • SMS द्वारा आवेदकों को शिविर की सूचना

  • डिजिटल मॉनिटरिंग और रिकॉर्डिंग की सुविधा

शिविर में होंगे ये कार्य

  • योजनाओं की जानकारी देना

  • आवेदन पत्र उपलब्ध कराना

  • समस्याओं का डिजिटल समाधान

  • मुख्यमंत्री और मंत्रीगण लेंगे फीडबैक

  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित

राज्य सरकार का दावा है कि यह कार्यक्रम जनता से सीधे संवाद और समस्याओं के त्वरित समाधान का मॉडल बनेगा। वहीं विपक्ष इसे सरकार की “विकास विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश” बता रहा है।