Home Chhattisgarh news Bilaspur news बिलासपुर में जाति प्रमाण पत्र में लापरवाही पर कार्रवाई: चार BEO को नोटिस, खाद सप्लाई और मवेशी नियंत्रण पर कलेक्टर सख्त

बिलासपुर में जाति प्रमाण पत्र में लापरवाही पर कार्रवाई: चार BEO को नोटिस, खाद सप्लाई और मवेशी नियंत्रण पर कलेक्टर सख्त

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बिलासपुर में जाति प्रमाण पत्र में लापरवाही पर कार्रवाई: चार BEO को नोटिस, खाद सप्लाई और मवेशी नियंत्रण पर कलेक्टर सख्त

बिलासपुर में जाति प्रमाण पत्र में लापरवाही पर कार्रवाई: चार BEO को नोटिस, खाद सप्लाई और मवेशी नियंत्रण पर कलेक्टर सख्त

बिलासपुर जिले में स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जिले के चार विकासखंडों के ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम संकुल समन्वयकों द्वारा आईडी और पासवर्ड जारी होने के बावजूद एक सप्ताह तक प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन फॉरवर्ड न करने पर उठाया गया है।

कलेक्टर ने मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक टीएल (टाइम लिमिट) बैठक में शासन की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए यह निर्देश दिए।

खाद वितरण की समीक्षा

बैठक के दौरान कलेक्टर ने समितियों में खाद की आपूर्ति पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि खाद की उपलब्धता की समितिवार दैनिक समीक्षा की जाए। साथ ही, जिन सोसायटियों में खाद की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से तखतपुर और सकरी की समितियों में तत्काल यूरिया खाद भेजने के आदेश दिए गए।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान पर फोकस

जिले में चल रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लगाए गए पेड़ों की देखरेख और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी कलेक्टर ने बल दिया। उन्होंने कहा कि जब तक पेड़ पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो जाते, तब तक उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।

मवेशियों की निगरानी और एफआईआर की तैयारी

कलेक्टर ने सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए पशु चिकित्सा विभाग को निर्देश दिए कि ऐसे मवेशियों की पहचान कर जानकारी एकत्र करें। इस डेटा के आधार पर संबंधित पशु मालिकों के खिलाफ थानों में एफआईआर दर्ज कराई जा सकेगी।

साथ ही, जिले के प्रत्येक ब्लॉक में दो पशु आश्रय स्थलों की स्वीकृति दी जा चुकी है। जल्द ही इनके लिए शेड और अन्य सुविधाओं के निर्माण कार्य भी शुरू कराए जाएंगे। फलदार पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपी जाएगी ताकि उन्हें भविष्य में आर्थिक लाभ मिल सके।