बिरगांव में गीता के नाम पर भ्रम फैलाने वाली किताबें, बजरंग दल ने कठोर कार्रवाई की माँग की
बिरगांव/उरला।
शनिवार, 30 अगस्त को उरला रोड क्षेत्र में चार महिलाओं को संदिग्ध धार्मिक पुस्तकें बेचते हुए पकड़ा गया। ये महिलाएँ केवल 20 रुपये में “गीता तेरी ज्ञान अमृत” और “ज्ञान गंगा” नामक किताबें लोगों को दे रही थीं। किताबों के कवर पर भगवद गीता और महाभारत की तस्वीरें छपी हुई थीं, जिससे लोग इसे गीता से जुड़ा ग्रंथ समझ लें।
लेकिन जब बजरंग दल बनजारी प्रखंड के कार्यकर्ताओं ने इसकी सामग्री पढ़ी, तो उसमें कई गंभीर आपत्तिजनक बातें सामने आईं। पुस्तकों में लिखा गया था कि “इस संसार में कोई भगवान या परमात्मा नहीं है, केवल कबीर ही परमात्मा हैं।” इतना ही नहीं, किताब में ईसाई और मुस्लिम धर्म के साथ-साथ अन्य सभी धर्मों को नीचा दिखाते हुए कबीर को ही सर्वोच्च ईश्वर बताया गया है। 
किताबों के लेखक के रूप में संत रामपाल जी महाराज का नाम दर्ज है, जबकि प्रकाशन कबीर प्रिंट्स, नई दिल्ली का बताया गया। बजरंग दल कार्यकर्ताओं का आरोप है कि गीता जैसे पवित्र ग्रंथ का नाम लेकर समाज में भ्रामक संदेश फैलाया जा रहा है और हिन्दू धर्म की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।
सूचना मिलते ही उरला पुलिस ने मौके पर पहुँचकर चारों महिलाओं को हिरासत में लिया और उनके खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई की। हालांकि बजरंग दल ने इस कार्रवाई को नाकाफी बताते हुए और सख्त धाराएँ लगाने की माँग की है।
बजरंग दल ने पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि इस प्रकरण में IPC की गंभीर धाराएँ लागू की जाएँ –
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धारा 295 – धार्मिक ग्रंथों का अपमान
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धारा 295A – धार्मिक भावनाओं को भड़काना
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धारा 153A – धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाना
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धारा 298 – धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना
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धारा 420 – धोखाधड़ी और गुमराह करना
संगठन का कहना है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में इस तरह की घटनाएँ और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे समाज में धार्मिक तनाव फैलने का खतरा रहेगा।