केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्रालय की पांच सदस्यीय जांच टीम, जो रूसा योजना के तहत मिली 20 करोड़ रुपये की उपयोगिता का आकलन करने आयी थी, ने अटल विश्वविद्यालय के विभिन्न ढांचागत विभागों, कक्षाओं और प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया। इस टीम ने पाया कि यहां अभी भी कई गंभीर निर्माण एवं रख‑रखाव की समस्याएँ बरकरार हैं।
छात्रों ने निरीक्षण दल को बताया कि हल्के मौसम में भी भवनों की छतों से पानी रिसने लगता है और दीवारों में दरारें उभर चुकी हैं। ऐसे में परेशान होकर बार-बार बिना ठोस योजना के अनावश्यक मरम्मत कार्य करवाए जा रहे हैं।
प्रयोगशालाओं की स्थिति भी निराशाजनक बताई गई, जहाँ उपकरण खराब हो चुके हैं, फंड की कमी के चलते नियमित प्रैक्टिकल पढ़ाए ही नहीं जा रहे और लैंग्वेज लैब जैसी सुविधाओं का उपयोग लगभग ठप्प है। इसके परिणामस्वरूप छात्रों को आधुनिक शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।
इन शिकायतों के अलावा, छात्रों ने प्रशासनिक उदासीनता व धन के अनुचित आवंटन पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि रूसा के तहत मिले भारी फंड के बावजूद छात्रों को अब तक सही सुविधाएँ नहीं मिल पायीं।
अब देखना होगा कि इस निरीक्षण के पश्चात केंद्रीय जांच टीम क्या सिफारिशें करती है और विश्वविद्यालय इसके कार्यान्वयन में कितनी तत्परता दिखाता है।