भारत माला प्रोजेक्ट में हुए मुआवजा घोटाले की जांच के लिए गठित चार समितियों में से दो समितियों ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अफसरों की लापरवाही की वजह से यह बड़ा फर्जीवाड़ा संभव हो पाया।
जांच में सामने आया कि जब जमीन दलाल बटांकन कर रहे थे और एक ही परिवार के 10-12 लोगों के नाम पर जमीन बांटी जा रही थी, तब संबंधित अफसरों को इसकी जानकारी थी। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। आश्चर्यजनक यह है कि पहली रिपोर्ट में दोष उन्हीं अफसरों पर डाला गया है, जिनके खिलाफ पहले से ही एफआईआर दर्ज है। नए नाम इसमें शामिल नहीं किए गए हैं।
बड़े नेता के परिवार पर भी शक
एक जांच समिति को मिली शिकायत में दावा किया गया है कि एक प्रभावशाली राजनेता के परिजनों को भी करीब 50 करोड़ का मुआवजा दिलाया गया है। हालांकि यह रकम सीधे उनके नाम पर न जाकर अन्य लोगों के नाम से बांटी गई। समिति अब यह जांच कर रही है कि जिन लोगों को पैसा मिला, उनका उस राजनेता से क्या संबंध है। चूंकि नेता सरकार में प्रभाव रखते हैं, इसलिए अधिकारियों से ठोस जानकारी निकालना मुश्किल साबित हो रहा है।
बाकी दो रिपोर्ट इसी हफ्ते
रायपुर और धमतरी संभाग से भारतमाला प्रोजेक्ट में 167 शिकायतें आई थीं। इनकी जांच चार कमेटियों को सौंपी गई थी। दो कमेटियां रिपोर्ट दे चुकी हैं, जबकि बाकी दो को सप्ताहभर का समय और दिया गया है। समय पर रिपोर्ट न सौंपने पर नोटिस जारी कर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पहले से आरोपी अफसर और दलाल
इस मामले में तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, पटवारी जितेंद्र कुमार साहू, बसंती घृतलहरे और लेखराम देवांगन पर पहले ही एफआईआर दर्ज है।
इनके अलावा जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा, विजय जैन, केदार तिवारी और उमा तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। सभी आरोपी फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर हैं। अब तक इनके अलावा किसी नए नाम पर कार्रवाई नहीं की गई है।
महादेव कावरे, संभागायुक्त रायपुर ने बताया कि उपलब्ध जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और इन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।