बस्तर संभाग के चार जिले—दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर—लगातार चार दिनों की मूसलाधार बारिश से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। यहां अब तक 200 से ज्यादा घर जमींदोज हो चुके हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया है और 2,196 लोगों को 43 राहत शिविरों में ठहराया गया है।

जान-माल का नुकसान
बाढ़ से अब तक 5 लोगों की जान जा चुकी है। दंतेवाड़ा जिले में धनिकारका नाले में नहाने गए 6 वर्षीय जुड़वा भाई डूब गए। दुखद यह है कि एक साल पहले ही उनके पिता की भी डूबने से मौत हो चुकी थी।
इसके अलावा बाढ़ में 17 पशुओं की मौत और 50 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान है। दंतेवाड़ा में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से शंखनी-डंकनी नदी का पानी रुक गया और आसपास के गांवों में तबाही मच गई।

राहत और बचाव कार्य
सीएम विष्णुदेव साय ने सभी प्रभावित जिलों में राहत कार्यों की समीक्षा की और अफसरों को निर्देश दिया कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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राहत शिविर स्कूलों, आश्रमों और इंडोर स्टेडियम में बनाए गए हैं।
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अब तक 165 मकानों को आंशिक और 86 मकानों को पूर्ण क्षति हुई है।
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मोबाइल टीमें स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं और पीने का पानी, दूध, दवाइयां और सूखा राशन बांटा जा रहा है।
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टूटे पुल-पुलियों और रास्तों की मरम्मत कर आवाजाही बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

मौसम का हाल
मौसम विभाग ने बिलासपुर, सरगुजा और रायगढ़ सहित कई जिलों में आज भी गरज-चमक और आंधी का अलर्ट जारी किया है। बलरामपुर में इस सीजन की सबसे ज्यादा बारिश (1,257.6 मिमी, सामान्य से 66% ज्यादा) दर्ज की गई है, जबकि महासमुंद और सरगुजा जैसे जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है।

बिजली गिरने का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार आकाशीय बिजली के दौरान दोपहर में खतरा सबसे ज्यादा रहता है। यह इंसान के सिर, गले और कंधों को तुरंत प्रभावित करती है और इसका तापमान सूर्य की ऊपरी सतह से भी ज्यादा होता है।
लोगों से अपील की गई है कि बारिश और आंधी के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में खड़े न हों।