छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में दो कैथोलिक नन की गिरफ्तारी का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। सोमवार को यह मुद्दा दिल्ली की संसद तक गूंजा, जहां केरल से आए सांसदों ने संसद भवन परिसर में प्रदर्शन कर भाजपा पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के दमन का आरोप लगाया।
सांसदों का कहना था कि भाजपा सरकार देश में अल्पसंख्यकों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बना रही है। इस प्रदर्शन के दौरान जोरदार नारेबाजी भी हुई। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, कांग्रेस नेता और सांसद केसी वेणुगोपाल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि कुछ लोग आदिवासी बेटियों को लालच देकर मानव तस्करी और धर्मांतरण की साजिश रच रहे थे, जिस पर प्रशासन ने कार्रवाई की।
कांग्रेस का पलटवार
छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा और आरएसएस पर अल्पसंख्यकों को टारगेट करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दुर्ग में दो ननों के साथ मारपीट की गई और बाद में उन्हें ही जेल भेज दिया गया। उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताया और कहा कि सरकार कानून का दुरुपयोग कर रही है।
घटना की पृष्ठभूमि
25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर दो नन, एक युवक और तीन आदिवासी युवतियों को लेकर विवाद हुआ। बताया गया कि तीनों युवतियों को आगरा काम दिलाने के बहाने ले जाया जा रहा था। पूछताछ में युवतियों ने ननों के साथ जाने की बात कही। इसी बीच कुछ स्थानीय लोगों ने बजरंग दल को सूचना दी, जिसके बाद स्टेशन पर हंगामा हुआ और पुलिस ने ननों सहित तीनों को हिरासत में ले लिया। ननों की पहचान प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस के रूप में हुई, जबकि युवक का नाम सुकमन मंडावी बताया गया। युवतियों को सखी सेंटर भेजने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना को धार्मिक उत्पीड़न करार देते हुए भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ननों को उनकी आस्था के कारण जेल भेजा गया, यह अन्याय है और यह सरकार की भीड़तंत्र की मानसिकता को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, दुर्ग की यह घटना अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुकी है, जहां एक तरफ सरकार इसे मानव तस्करी और धर्मांतरण की साजिश मान रही है, तो वहीं विपक्ष इसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ दमन बता रहा है।