Home Chhattisgarh news एंटीबायोटिक और मेडिकल सप्लाई की गुणवत्ता पर सवाल, 6 आइटम बैन, दोबारा जांच के आदेश

एंटीबायोटिक और मेडिकल सप्लाई की गुणवत्ता पर सवाल, 6 आइटम बैन, दोबारा जांच के आदेश

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एंटीबायोटिक और मेडिकल सप्लाई की गुणवत्ता पर सवाल, 6 आइटम बैन, दोबारा जांच के आदेश

छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई किए गए कुछ जरूरी मेडिकल आइटम की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर प्रोटामिन सल्फेट इंजेक्शन, जिसे हिपेरिन के बाद मरीज का खून सामान्य करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उसकी प्रभावशीलता को लेकर संदेह जताया गया है। जांच के लिए इस इंजेक्शन के सैंपल को दोबारा लैब भेजा गया है।

इसके अलावा, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने शिफा ट्राई एक्शन एंटीबायोटिक इंजेक्शन पाउडर (1 ग्राम), डेक्सट्रोज विथ सोडियम क्लोराइड और तीन अलग-अलग साइज (6.0, 7.0, 7.5) के सर्जिकल ग्लव्स समेत कुल छह आइटम्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। सभी अस्पतालों से इनका स्टॉक वापस मंगाया गया है।

गंभीर लापरवाही का आरोप
डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटामिन इंजेक्शन के असर में 20 से 25 मिनट लग रहे हैं, जबकि सामान्य स्थिति में यह प्रक्रिया 1-2 मिनट में पूरी हो जानी चाहिए। इससे ओपन हार्ट सर्जरी और एंजियोप्लास्टी जैसे मामलों में मरीजों की ब्लीडिंग रुक नहीं पा रही है, जिससे जान का खतरा बढ़ गया है।

यह इंजेक्शन नासिक स्थित वाइटल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित है, जिसका बैच नंबर V24133 है। यह इंजेक्शन जून 2024 में बना है और मई 2026 तक वैध है।

पहले से मिल रहीं थीं शिकायतें
ग्लव्स की गुणवत्ता को लेकर पहले से ही कई डॉक्टरों ने शिकायतें की थीं। पहनते ही ग्लव्स फट जाते हैं और उनमें से पाउडर जैसा बुरादा निकलता है। ये ग्लव्स अनोदिता हेल्थकेयर और सन मार्ट पैकेजिंग द्वारा सप्लाई किए गए थे।

इसी तरह डेक्सट्रोज विथ सोडियम क्लोराइड हसीब फार्मास्यूटिकल्स से प्राप्त हुआ था, जबकि शिफा ट्राई एक्शन इंजेक्शन थ्योन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड द्वारा निर्मित है।

खबर के बाद हुई कार्रवाई
माना जा रहा है कि इन दवाओं और सामग्री को खपाने की मंशा से जानबूझकर उपयोग पर रोक लगाने में देरी की गई। पत्रिका द्वारा 25 मई को “अब खून गाढ़ा करने वाला इंजेक्शन निकला घटिया” शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद ही विभाग हरकत में आया और कार्रवाई की गई।

अब सभी संदिग्ध दवाओं और सामग्री की दोबारा जांच करवाई जा रही है, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।