रायपुर। शिवभक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा का प्रतीक सावन मास शुरू हो गया है। जैसे ही यह पावन महीना आरंभ हुआ, शहर के शिवालयों में भक्तों का हुजूम उमड़ने लगा। शुक्रवार को श्रीराम चरितमानस के अखंड पाठ के साथ जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक की शुरुआत हो चुकी है, जो 9 अगस्त तक जारी रहेगी। मंदिरों को हरे पत्तों, फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। हर सोमवार शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटेगी और ‘हर-हर महादेव’ की गूंज वातावरण को भक्तिमय बना देगी।
शिव की विशेष आराधना का महीना
पंडितों के अनुसार, सावन मास हिंदू पंचांग का पांचवां महीना है और यह पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। खासकर सावन के सोमवारों को अत्यधिक फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने शिवजी की आराधना से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विवाह आदि की बाधाएं दूर होती हैं।
हटकेश्वरनाथ मंदिर में शुरू हुई भक्तों की भीड़
खारुन नदी के किनारे स्थित प्राचीन हटकेश्वरनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गई है। मंदिरों में सेवा समितियों द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। पूरे महीने पूजा-पाठ, भजन और कीर्तन का दौर जारी रहेगा।
शिव पूजा की सामग्री और विधि
शिवलिंग की पूजा में चंदन, फूल, बिल्वपत्र, गंगाजल, शहद, गाय का दूध, धतूरा, भांग, पंचमेवा, धूप, दीप, इत्र, मौली, जनेऊ, कपूर आदि का प्रयोग किया जाता है। पूजा करते समय गंगाजल सबसे पहले जलहरी (मां पार्वती का प्रतीक) पर चढ़ाया जाता है, फिर दाईं ओर गणेश जी, बाईं ओर कार्तिकेय और अंत में शिवलिंग के मध्य में जल अर्पित किया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, सोमवार व्रत को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। यदि किसी कारणवश व्रत नहीं रखा जा सके, तो शिवजी से क्षमा याचना करनी चाहिए।
चार पावन सोमवार और कई धार्मिक पर्व
इस बार सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं—14 जुलाई, 21 जुलाई, 28 जुलाई और 4 अगस्त। हर सोमवार को मंदिरों में मेला लगेगा और भक्ति का माहौल बना रहेगा।
सावन में कई बड़े पर्व भी आएंगे, जिनसे धार्मिक उत्साह बना रहेगा:
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13 जुलाई – कजली तीज
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15 जुलाई – मौनी पंचमी
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18 जुलाई – कामदा एकादशी
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22 जुलाई – प्रदोष व्रत
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25 जुलाई – हरियाली अमावस्या
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27 जुलाई – मधुश्रावणी तीज
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9 अगस्त – रक्षाबंधन
सावन का यह महीना श्रद्धा, भक्ति और उत्सवों से भरपूर रहेगा, जिसमें शिवभक्त अपनी आस्था को गहराई से महसूस करेंगे।