Home Chhattisgarh news 900 साल पुरानी विरासत उपेक्षा की शिकार, खुले संग्रहालय में पसरा है सन्नाटा

900 साल पुरानी विरासत उपेक्षा की शिकार, खुले संग्रहालय में पसरा है सन्नाटा

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900 साल पुरानी विरासत उपेक्षा की शिकार, खुले संग्रहालय में पसरा है सन्नाटा

बालोद (छत्तीसगढ़): प्रदेश के पहले खुले संग्रहालय की हालत इन दिनों बेहद खराब है। 1992 में बालोद के बूढ़ातालाब क्षेत्र में स्थापित इस ऐतिहासिक स्थल की अनदेखी के चलते यहां असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। कभी जिन प्राचीन मूर्तियों को बड़े गर्व से प्रदर्शित किया गया था, आज वे झाड़ियों में छिपी हैं, टूट चुकी हैं या गायब हो गई हैं।

यह संग्रहालय मध्यप्रदेश शासनकाल के दौरान बालोद एसडीएम और नगर पालिका प्रशासक आशुतोष अवस्थी की पहल पर पुरातत्व विभाग के सहयोग से बनाया गया था। उस समय यहां 105 प्राचीन मूर्तियां रखी गई थीं, जिनमें से 5 की 1993 में चोरी हो चुकी है। इसके बावजूद आज तक यहां कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।

स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका इस संग्रहालय की हालत से लगभग अनजान हैं। इसकी बाउंड्रीवाल के पीछे का गेट टूट चुका है और आए दिन नशेड़ी वहां शराब पीते देखे जाते हैं। कुछ ग्रामीण अपने मवेशियों को अंदर घुसा देते हैं, जिससे मूर्तियों को नुकसान पहुंच रहा है।

संग्रहालय में रखी गई मूर्तियां 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच की हैं और इनका निर्माण बालोद के राजा बलदेव शाह द्वारा अपने वीर सैनिकों की स्मृति में कराया गया था। मूर्तियों में भगवान गणेश, चामुंडा देवी, भगवान बुद्ध के याचक स्वरूप और योद्धाओं की आकृतियां शामिल हैं।

इतिहासकार अरमान अश्क के अनुसार, ये मूर्तियां नर्राटोला गांव के तालाब किनारे पाई गई थीं और इनका ऐतिहासिक महत्व न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि अविभाजित मध्यप्रदेश में भी था।

अब जबकि मूर्तियां टूट रही हैं, चोरी हो रही हैं और झाड़ियों में छिप गई हैं, नगर पालिका के सीएमओ सौरभ शर्मा का कहना है कि वे इस विषय में जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। हालांकि यह कब होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

इतिहास को सहेजने की जरूरत: इस संग्रहालय की दुर्दशा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति उदासीनता भी उजागर करती है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो यह विरासत पूरी तरह से नष्ट हो सकती है।