बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में रिटायर्ड ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नीलकमल गर्ग को बड़ी राहत दी है। उन्होंने खुद अदालत में अपनी पैरवी करते हुए यह मुकदमा जीता। डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि उन्हें नवंबर 1993 से पीएचडी करने पर दो अतिरिक्त वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाए। साथ ही बकाया राशि पर 6% ब्याज भी देने का निर्देश दिया गया है। यह प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी करनी होगी।
गर्ग की नियुक्ति 1983 में सरगुजा जिले के बैकुंठपुर में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर हुई थी। सेवा के दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अनुमति लेकर 1993 में हिंदी विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। इसके बाद 1995 में उन्होंने शासन से नियमों के तहत दो अग्रिम वेतनवृद्धि का लाभ देने की मांग की, लेकिन विभाग ने उनका आवेदन खारिज कर दिया।
2017 में गर्ग ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि 8 मई 2025 को सिंगल बेंच ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि पीएचडी अध्ययन की अनुमति सक्षम प्राधिकारी से नहीं ली गई थी। इस फैसले को उन्होंने डिवीजन बेंच में चुनौती दी।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की बेंच ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, सेवा के दौरान पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले अधिकारी दो अतिरिक्त वेतनवृद्धि के हकदार हैं। अदालत ने कहा कि गर्ग का आवेदन उच्च शिक्षा के लिए था और इसमें पीएचडी भी शामिल थी। राज्य सरकार पहले भी ऐसे मामलों में कर्मचारियों को वेतनवृद्धि का लाभ देती रही है।
इस ऐतिहासिक फैसले के साथ गर्ग को न केवल वित्तीय लाभ मिलेगा बल्कि 30 साल लंबी कानूनी लड़ाई का सुखद अंत भी हुआ है।