छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक बड़ा फाइनेंशियल फ्रॉड सामने आया है, जिसमें एक प्राइवेट फर्म ‘आरवी ग्रुप’ ने लोन दिलाने के नाम पर 130 सरकारी कर्मचारियों से करीब 42 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोप है कि यह गिरोह शिक्षकों और शासकीय कर्मचारियों को आकर्षक ऑफर देकर लोन दिलाने की बात करता था और बाद में उनके नाम पर लोन लेकर रकम हड़प लेता था।
इस तरह रची गई ठगी की साजिश
नवंबर 2022 में अंबिकापुर के तुलसी चौक क्षेत्र में ‘स्पॉश एडवाइजर प्राइवेट लिमिटेड’ नामक ऑफिस खोला गया। कंपनी ने दावा किया कि उसके बैंक और वित्तीय संस्थानों से अच्छे संबंध हैं, जिससे वह खुद गारंटर बनकर लोन पास करवा सकती है। कर्मचारियों को झांसे में लेने के लिए बड़े होटलों में पार्टी और कॉन्फ्रेंस कराई गईं, जहां उन्हें यह समझाया गया कि लोन की ईएमआई कंपनी भरेगी और आधी रकम निवेश में लगेगी जिससे उन्हें लाभ होगा।
बैंक गए बिना पास हुआ लोन
कर्मचारियों को बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ी। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए और उनके नाम से लाखों के लोन पास करवा लिए गए। लोन की आधी राशि कंपनी के खातों में ट्रांसफर करवाई गई, जिनमें एएमएस सॉल्यूशन, सुरेंद्र सिंह और मनोज प्रधान के निजी खाते शामिल हैं। इसके साथ ही कर्मचारियों के नाम पर बीमा भी करवा दिया गया।
फर्जी दस्तावेज और जाली साइन
बाद में जब बैंकों से नोटिस आना शुरू हुआ तब पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ। जांच में सामने आया कि कई दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे और दिए गए चेक पर भी जाली साइन थे।
इन लोगों पर दर्ज हुआ केस
गांधीनगर थाना पुलिस ने शिकायतों के आधार पर आरवी ग्रुप के फाउंडर मनोज कुमार प्रधान समेत छह लोगों—मनोज भगत, सुरेंद्र सिंह करियाम, अभय गुप्ता, विष्णु प्रजापति और सुदेश एक्का—के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120B (साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है।
ठगी की राशि और बढ़ सकती है
एएसपी अमोलक सिंह ढिल्लों के मुताबिक अब तक 130 कर्मचारियों से 42 करोड़ की ठगी का खुलासा हो चुका है, लेकिन आशंका है कि और लोग सामने आ सकते हैं, जिससे ठगी की रकम और अधिक हो सकती है। जांच प्रक्रिया अभी जारी है।
यह मामला सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाकर सुनियोजित तरीके से की गई एक बड़ी आर्थिक धोखाधड़ी का है, जिसमें आरोपी फरार हैं और पुलिस उनके पीछे लगी है।