रायपुर।
पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में बीते छह महीनों के भीतर हार्ट अटैक के 1000 मरीजों का इलाज किया गया। सबसे ज्यादा मामले जनवरी में सामने आए – 234 मरीज। आश्चर्यजनक बात यह है कि यह आंकड़ा उस समय का है जब ठंड अपने पीक पर नहीं होती। विशेषज्ञ मानते हैं कि दिसंबर की सर्दी का असर जनवरी में देखने को मिला होगा।
हार्ट पेशेंट्स में 10% की मौत का औसत
ACI से मिली जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती हार्ट अटैक मरीजों की मौत का औसत 10 प्रतिशत है। इलाज के बाद डिस्चार्ज होने वाले मरीजों में भी एक महीने के भीतर उतने ही प्रतिशत लोगों की जान चली जाती है। एक साल के भीतर यह आंकड़ा कुल मिलाकर 30 फीसदी तक पहुंच जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर समय रहते इलाज नहीं हुआ तो मरीज की मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
हर उम्र पर असर – सबसे युवा मरीज की उम्र 35
डेटा के अनुसार, इन 1000 मरीजों में अधेड़ उम्र के साथ-साथ बुजुर्ग भी शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि सबसे कम उम्र का मरीज सिर्फ 35 साल का था। अधिकतर मरीजों की एंजियोप्लास्टी की गई।
हर मौसम में खतरा – ठंड और गर्मी दोनों बढ़ाते हैं रिस्क
ठंड के मौसम में नसों के सिकुड़ने और संक्रमण के कारण ब्लड सप्लाई बाधित होती है, जिससे हार्ट को ज्यादा दबाव झेलना पड़ता है। दूसरी ओर, भीषण गर्मी भी हार्ट पर असर डालती है। अप्रैल में जब प्रदेश में लू चल रही थी, तब भी 132 मरीज अटैक के बाद अस्पताल पहुंचे। यानी मौसम चाहे ठंडा हो या गर्म, खतरा बना रहता है।
6 महीने का मरीज डेटा:
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जनवरी: 234
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फरवरी: 135
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मार्च: 144
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अप्रैल: 132
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मई: 180
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जून: 175
कुल मरीज: 1000
डॉ. शिवकुमार शर्मा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार:
“हार्ट अटैक के बाद मरीज कितनी जल्दी अस्पताल पहुंचता है, यही उसकी जान बचने या न बचने का बड़ा कारण होता है। कई बार अटैक इतना तीव्र होता है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है। कुछ केस में इलाज के दौरान या कैथलैब में भी जान चली जाती है।”
क्या कहता है मेडिकल डेटा?
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30 से 59 मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ देते हैं।
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अस्पताल में करीब 7% मरीजों की मौत होती है।
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एक साल में कुल 30% मरीजों की मौत दर्ज होती है।
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5 साल के भीतर 30–40% हार्ट अटैक सर्वाइवर्स की जान चली जाती है।
बचाव कैसे करें?
डॉक्टरों के मुताबिक, जीवनशैली में सुधार, शराब और सिगरेट से दूरी और नियमित व्यायाम ही हार्ट को स्वस्थ बनाए रखने के सबसे कारगर उपाय हैं।
इस बढ़ते ट्रेंड को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है, लेकिन जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव ही इस साइलेंट किलर से बचने का रास्ता है।