रायपुर में अपराधियों के हौसले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। शनिवार देर रात भवानी नगर इलाके में एक और हत्या ने शहर को दहला दिया। नशे में धुत दो भाइयों, राहुल यादव और ओमप्रकाश यादव ने 30 वर्षीय सुनील राव की गैंती से वार कर हत्या कर दी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों को शक था कि सुनील उनके घर की महिलाओं पर बुरी नजर रखता था। इस शक और नशे की हालत में उन्होंने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
बीते 72 घंटे में यह रायपुर में पांचवीं हत्या थी। पुलिस अब तक तीन हत्याओं का खुलासा कर चुकी है, लेकिन अभनपुर में हुए दोहरे हत्याकांड की गुत्थी अब तक सुलझ नहीं पाई है।

तीन दिन में कहां-कहां हुई हत्याएं?
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16 जुलाई: अभनपुर के बिरोदा गांव में भूखन ध्रुव और उसकी पत्नी रुक्मणी की धारदार हथियार से हत्या।
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17 जुलाई तड़के: मंदिर हसौद पेट्रोल पंप में लूट के दौरान योगेश मिरी की दो लोगों ने हत्या की।
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17 जुलाई: भनपुरी में मोबाइल चोरी के बंटवारे को लेकर युवक धनेश की उसके दोस्त ने हत्या की।
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19 जुलाई: भवानी नगर में पड़ोसी भाइयों ने सुनील राव की हत्या कर दी।
नशा बन रहा अपराध की जड़
पुलिस रिकॉर्ड और रिपोर्ट्स के अनुसार, हत्या के 95% मामलों में आरोपी किसी न किसी प्रकार के नशे के आदी होते हैं। शराब, गांजा या नशीली दवाओं का सेवन कर वे सामान्य विवादों को हिंसक रूप दे देते हैं। नशे की हालत में उन्हें इस बात का भी अहसास नहीं होता कि उन्होंने क्या कर डाला है। जब नशा उतरता है, तब पछतावा होता है—but तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
इन अपराधों का असर सिर्फ आरोपी पर नहीं, उनके पूरे परिवार पर पड़ता है। उनकी पत्नियों और बच्चों की जिंदगी मुश्किलों में घिर जाती है।
तीन साल में 220 हत्याएं
पिछले तीन वर्षों में रायपुर में हत्या के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।
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2022: 75 हत्याएं
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2023: 65 हत्याएं
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2024: 79 हत्याएं – अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा
2025 के पहले छह महीनों में ही 30 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इन मामलों में 90% हत्याएं जान-पहचान या पारिवारिक विवादों में हुई हैं।
नशे के खिलाफ कार्रवाई, लेकिन अपराध नहीं थमे
पुलिस का दावा है कि नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले साल:
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2400 किलो गांजा जब्त
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320 गांजा तस्कर गिरफ्तार
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24010 नशीली टेबलेट के साथ 40 आरोपी
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660 शीशी नशीली सिरप के साथ 18 लोग
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अफीम के 13 और हेरोइन के 9 तस्कर गिरफ्तार
कुल 413 तस्करों से 5 करोड़ 8 लाख का नशीला सामान बरामद हुआ।
विशेषज्ञों की राय
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह का कहना है कि हाल की हत्याओं के पीछे कोई बड़ी वजह नहीं है। मामूली विवाद और नशे की हालत में इन घटनाओं को अंजाम दिया गया। यह मानसिक असंतुलन और नशे की लत का नतीजा है। नशे के आदी लोगों को समय पर काउंसलिंग और इलाज मिलना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष:
रायपुर में लगातार हो रही हत्याएं सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं, समाज के मानसिक और नशे से जुड़े संकट को भी दर्शाती हैं। जरुरत है कि पुलिस के साथ-साथ समाज भी इस दिशा में गंभीर पहल करे, ताकि छोटी-छोटी बातों पर जान लेना आम न हो जाए।